तिरुवनंतपुरम , अक्टूबर 06 -- केरल में अति पिछड़ा समुदाय महासंघ (एमबीसीएफ) ने सरकारी नौकरियों में आरक्षण नियमों के उल्लंघन, योग्यता को दरकिनार कर 'बैकडोर' (पिछले दरवाजे से) नियुक्तियों और रैंक सूचियों में बड़े पैमाने पर की जा रही अनियमितताओं के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन किया है।
केरल सरकार की अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) सूची में शामिल उन पिछड़े समुदायों का प्रतिनिधित्व करने वाले इस महासंघ ने मंगलवार को 'अन्य पिछड़ा हिंदू (ओबीएच) समुदायों को मिलने वाले आरक्षण पर चिंता जताई। गौरतलब है कि राज्य में ओबीएच समुदायों के लिए आरक्षण का कोई अलग प्रतिशत तय नहीं है।
एमबीसीएफ का आरोप है कि मौजूदा आरक्षण व्यवस्था, जिसमें रोटेशन, सब-रोटेशन और रोस्टर सिस्टम शामिल हैं- के कारण पिछड़े समुदायों के कुछ वर्गों को उनके वाजिब मौके नहीं मिल पा रहे हैं। उन्होंने खास तौर पर 20-यूनिट वाले रोस्टर सिस्टम में की जा रही हेरफेर को रोकने की मांग की और कहा कि पूरी आरक्षण और भर्ती प्रक्रिया की समीक्षा की जानी चाहिए तथा इसे और अधिक पारदर्शी और वैज्ञानिक बनाया जाना चाहिए।
महासंघ ने यह भी मांग की कि लोक सेवा आयोग की भर्तियों में गड़बड़ियों से जुड़ी शिकायतों को उस 'विशेष जांच दल' (एसआईटी) के दायरे में लाया जाए जिसे लोक सेवा आयोग से जुड़ी गड़बड़ियों की जांच के लिए बनाया गया है।
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