तिरुवनंतपुरम , अक्टूबर 03 -- केरल खाद्य सुरक्षा विभाग ने राज्यव्यापी निरीक्षण अभियान के दौरान 1,436.4 लीटर खाद्य तेल ज़ब्त कर नष्ट कर दिया, क्योंकि यह तेल बार-बार गर्म किये जाने के कारण इस्तेमाल करने के लायक नहीं रह गया था। साथ ही, विभाग ने 74 खाद्य प्रतिष्ठानों के कामकाज को भी निलंबित कर दिया।
खाने-पीने की जगहों पर खाद्य तेल का बार-बार इस्तेमाल को रोकने के लिए शुरू किये गये 'ऑपरेशन थेलिमा' के तहत 29 और 30 सितंबर को जांच की गयी। स्वास्थ्य और देवस्वोम मंत्री के. मुरलीधरन ने बताया कि विशेष दस्ते ने सभी 14 ज़िलों में 1,834 जगहों की जांच की।
खाद्य सुरक्षा मानकों का उल्लंघन करने वाले 19 प्रतिष्ठानों के खिलाफ खाद्य सुरक्षा कानूनों के तहत कानूनी कार्रवाई की सिफारिश की गई है, जबकि साफ-सफाई, लाइसेंसिंग और अन्य खाद्य सुरक्षा प्रक्रियाओं की कमियों के लिए 147 सुधार और सुधार-संबंधी नोटिस जारी किये गये हैं।
निरीक्षण मुख्य रूप से सड़क किनारे बने भोजनालयों, चाय की दुकानों, खाने-पीने के स्टॉल और स्नैक बनाने वाली इकाइयोंपर केंद्रित थे, जहां बड़ी मात्रा में तले हुए स्नैक्स और खाने की अन्य तली हुई चीज़ें बनाई और बेची जाती हैं।
मंत्री ने कहा कि खाद्य सुरक्षा अधिकारियों और अन्य कर्मियों से गठित विशेष दस्तों ने तले हुए खाद्य पदार्थों की तैयारी और बिक्री के चरम समय के मद्देनजर 1600 बजे से निरीक्षण शुरू किया।
खाद्य तेल की गुणवत्ता की जांच टोटल पोलर कंपाउंड्स (टीपीसी) मीटर और मोबाइल खाद्य परीक्षण प्रयोगशालाओं का उपयोग करके की गयी। कुल 74 तेल के नमूनों का मौके पर ही परीक्षण किया गया और अधिकारियों को उल्लंघन पाये जाने पर तत्काल कार्रवाई करने में सक्षम बनाया गया।
टीपीसी बार-बार गर्म करने के कारण खाद्य तेल के खराब होने का एक संकेतक है। प्रचलित खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत, 25 प्रतिशत से अधिक टीपीसी स्तर वाले खाद्य तेल का उपयोग खाना पकाने के लिए नहीं किया जा सकता।
खाद्य तेल को बार-बार गर्म करने से उसमें रासायनिक क्षरण होता है और ध्रुवीय यौगिकों तथा अन्य क्षरण उत्पादों का निर्माण होता है। मंत्री ने कहा कि ऐसे क्षरित तेल का लगातार उपयोग स्वास्थ्य के लिए जोखिम उत्पन्न कर सकता है।
जो खाने-पीने के संस्थान बड़ी मात्रा में खाद्य तेल का इस्तेमाल करते हैं, उन्हें इसके इस्तेमाल और निपटान का रिकॉर्ड रखना ज़रूरी है। इस्तेमाल किए गए खाना पकाने के तेल को बायोडीज़ल में बदलने के लिए अधिकृत एजेंसियों को सौंप देना चाहिए।श्री मुरलीधरन ने कहा कि 'ऑपरेशन थेलिमा' के तहत विशेष जांच जारी रहेगी और जनता से मिली शिकायतों के आधार पर इस अभियान का दायरा और इलाकों तक बढ़ाया जाएगा।
उन्होंने कहा कि कारोबार के नाम पर जन-स्वास्थ्य को खतरे में डालने वाले उल्लंघनों पर कोई समझौता नहीं किया जाएगा और जिन प्रतिष्ठानों में उल्लंघन की पुष्टि होगी, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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