पतनमथिट्टा , मार्च 29 -- केरल में पतनमथिट्टा जिले के कलंजूर के रहने वाले 30 वर्षीय एक व्यक्ति ने आरोप लगाया है कि इलाज में गंभीर लापरवाही के कारण उसे अपना पैर कटवाना पड़ा।
शिकायतकर्ता अभिमन्यु एक एयर-कंडीशनर मैकेनिक के तौर पर काम करता था। पिछले साल दिसंबर में एक दुर्घटना का शिकार हो गया था, जिसके कारण उसका पैर टूट गया था। शुरुआत में उसने कोन्नी मेडिकल कॉलेज में इलाज करवाया, जहाँ डॉक्टरों ने कथित तौर पर दो जगहों पर पैर टूटने की बात कही और उसे तुरंत सर्जरी करवाने की सलाह दी।
इसके बाद उसे आगे के इलाज के लिए कोट्टायम मेडिकल कॉलेज भेजा दिया। अभिमन्यु ने आरोप लगाया है कि कोट्टायम पहुँचने पर उसे दो दिनों तक स्ट्रेचर पर ही रखा गया और किसी वार्ड में शिफ्ट नहीं किया गया, जबकि उसकी हालत को तुरंत इलाज की ज़रूरत थी। उसने दावा किया कि इस दौरान उसे दर्द से राहत देने वाली पर्याप्त दवाएँ भी नहीं दी गईं, जिससे उसे काफ़ी तकलीफ़ हुई।
उसके बयान के अनुसार, 31 दिसंबर को सर्जरी की गई, जिसके दौरान टूटी हुई टांग में एक मेटल रॉड डाली गई। इस प्रक्रिया के बाद चिकित्सकीय जाँचों में कथित तौर पर एक नस को नुकसान पहुँचने की बात सामने आई। इसके जवाब में, डॉक्टरों ने एक और सर्जरी की, जिसमें दूसरी टांग से एक नस निकालकर प्रभावित टांग में लगाई गई, ताकि टांग की कार्यक्षमता को वापस लाया जा सके।
हालाँकि, दूसरी सर्जरी के बाद स्थिति और बिगड़ गई, क्योंकि जिस टांग का ऑपरेशन हुआ था, उसमें उनकी संवेदना खत्म हो गई। इसके बाद डॉक्टरों ने उन्हें बताया कि उनकी बिगड़ती हालत को देखते हुए टांग काटना ही एकमात्र विकल्प बचा है। एक जनवरी यानी नये साल के पहले दिन सर्जरी करके उसकी टांग काट दी गई।
टांग कटने के बाद अभिमन्यु बिस्तर पर ही पड़े हैं और काम करने में असमर्थ हैं। वह अपने परिवार में अकेले कमाने वाले सदस्य हैं। उनके परिवार में उनकी पत्नी और एक छोटा बच्चा है, और उनके पिता का निधन लगभग एक साल पहले हो गया था। उनकी रोजी-रोटी अचानक छिन जाने से परिवार अब गंभीर आर्थिक संकट और अनिश्चितता का सामना कर रहा है। इस घटना ने चिकित्सकीय लापरवाही को लेकर चिंता बढ़ा दी है।
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