तिरुवनंतपुरम , जून 29 -- केरल पुलिस ने कंपनियों, व्यापारियों और कॉर्पोरेट संस्थानों को 'बॉस स्कैम' नामक एक खतरनाक साइबर धोखाधड़ी को लेकर अलर्ट रहने की चेतावनी दी है।

'सीईओ इंपर्सनेशन फ्रॉड' के नाम से भी जाने जाने वाला यह नया फर्जीवाड़ा विशेष रूप से कंपनियों के बड़े अधिकारियों और वित्त विभाग के कर्मचारियों को निशाना बनाता है। इसमें फर्जी पहचान और खतरनाक सॉफ्टवेयर (मैलवेयर) का इस्तेमाल करके कंपनियों से मोटी रकम स्थानांतरित करवा ली जाती है।

केरल पुलिस के परामर्श के अनुसार, साइबर अपराधी सबसे पहले भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) या किसी सरकारी ऑडिट टीम के नाम पर फर्जी और जरूरी संदेश भेजते हैं, जिससे कर्मचारियों में घबराहट पैदा हो जाती है।

इसके बाद, कर्मचारियों को झांसे में लेकर मैलवेयर से भरी हुई खतरनाक ज़िप फाइलें खुलवाई जाती हैं। इससे हमलावर कंपनी के कंप्यूटर सिस्टम में घुस जाते हैं और उस पर अपना कब्जा जमा लेते हैं।

कंप्यूटर तक पहुंच मिलते ही, ये जालसाज या तो बड़े अधिकारियों की फर्जी प्रोफाइल बनाते हैं, या उनके असली अकाउंट हैक कर लेते हैं। इसके बाद वे कर्मचारियों के 'व्हाट्सएप वेब सेशन' का फायदा उठाकर सीईओ या अन्य बड़े अफसरों के नाम पर संदेश भेजते हैं और अकाउंट विभाग के लोगों को तुरंत पैसा स्थानांतरित करने का हुक्म देते हैं।

यह घोटाला बिल्कुल असली और बहुत जरूरी जैसा लगता है, जिसकी वजह से धोखाधड़ी का पता चलने से पहले ही साइबर अपराधी बहुत सारा पैसा उड़ा लेते हैं।

केरल पुलिस ने कर्मचारियों को सलाह दी है कि वे सिर्फ व्हाट्सएप मैसेज या ई-मेल के भरोसे कोई भी पैसों का लेन-देन न करें, चाहे वह कितना भी असली क्यों न लग रहा हो। बड़ी रकम स्थानांतरित करने से पहले, अकाउंट टीम को चाहिए कि वे संबंधित बड़े अधिकारी को फोन कॉल या किसी दूसरे सत्यापित माध्यम से सीधे संपर्क करें और हर भुगतान आग्रह की खुद जांच करें।

परामर्श में कंपनियों को चेतावनी दी गयी है कि वे किसी भी अनजान स्रोत से मिली ज़िप, ईएक्सई या डीएलएल फाइलों को कभी न खोलें, क्योंकि इनमें मौजूद मैलवेयर पूरे कंप्यूटर नेटवर्क को ठप कर सकते हैं।

कर्मचारियों से यह भी कहा गया है कि वे अपने व्हाट्सएप के 'लिंक्ड डिवाइसेज' सेक्शन को लगातार जांचते रहें, ताकि यह पक्का हो सके कि कोई अनजान उपकरण उनके अकाउंट से जुड़ा तो नहीं है।

साइबर सुरक्षा को मजबूत करने के लिए, केरल पुलिस ने सुझाव दिया है कि कंपनियां बड़े लेन-देन के लिए 'मल्टी-लेवल अप्रूवल' (कई स्तरों पर मंजूरी) की व्यवस्था लागू करें, ताकि कोई भी अकेला व्यक्ति बिना किसी अतिरिक्त जांच के बड़ा भुगतान न कर सके। ऐसे सुरक्षा उपायों से इस तरह के फर्जीवाड़े के खतरे को काफी कम किया जा सकता है।

पुलिस ने कहा कि अगर कोई भी इस साइबर वित्तीय धोखाधड़ी का शिकार बनता है, तो उसे तुरंत राष्ट्रीय साइबर अपराध हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करना चाहिए या आधिकारिक राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर जाकर अपनी शिकायत दर्ज करानी चाहिए।

जल्दी शिकायत करने से अधिकारियों को धोखाधड़ी वाले लेन-देन को रोकने और चोरी हुआ पैसा वापस पाने में बड़ी मदद मिल सकती है।

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