कोझिकोड , जुलाई 16 -- केरल साइबर पुलिस ने एलाथुर की विधायक विद्या बालकृष्णन को मंत्री पद की पेशकश करने वाले व्हाट्सएप कॉल का सुराग दिल्ली में ढूंढ निकाला है।
जांचकर्ताओं को संदेह है कि यह जनप्रतिनिधियों को निशाना बनाने वाला एक संगठित धोखाधड़ी का मामला है।
कोझिकोड साइबर पुलिस की प्रारंभिक जांच में पाया गया कि कांग्रेस विधायक से संपर्क करने के लिए इस्तेमाल किया गया व्हाट्सएप नंबर फर्जी था और कॉलर की पहचान छिपाने के लिए इसे दूसरों के नाम पर खोला गया था। जांचकर्ता इस बात की जांच कर रहे हैं कि क्या जालसाजों ने इसी तरह के तौर-तरीकों का इस्तेमाल करके कई अन्य विधायकों को भी निशाना बनाया है।
जांच के अनुसार, कई जनप्रतिनिधियों को मंत्री पद या अन्य राजनीतिक लाभ का वादा करने वाले इसी तरह के कॉल आये हो सकते हैं। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि क्या यह घटना किसी बड़े और सुनियोजित घोटाले का हिस्सा है।
विधायक ने छह जुलाई को एक व्हाट्सएप कॉल आने के बाद शिकायत दर्ज करायी थी। कॉल करने वाले ने खुद को 'राज कुमार' बताया था और दावा किया था कि वह नयी दिल्ली में वायनाड की सांसद प्रियंका गांधी के कार्यालय से जुड़ा एक अधिकारी है।
अंग्रेजी में हुई लगभग 10 मिनट की बातचीत के दौरान, फोन करने वाले ने कथित तौर पर दावा किया कि केरल में जल्द ही कैबिनेट का विस्तार होने वाला है। उसने विधायक से मंत्री पद दिलाने के बदले तीन करोड़ रुपये की मांग की। संदेह होने पर श्री बालकृष्णन ने इस मांग को सीधे तौर पर खारिज नहीं किया, बल्कि कॉल करने वाले से कहा कि भुगतान बाद में किया जा सकता है। इसके बाद उन्होंने कांग्रेस के एक अन्य सांसद से संपर्क किया, जिन्होंने कथित तौर पर कॉल करने वाले के साथ उनका फोन नंबर साझा किया था। उस सांसद ने उन्हें बताया कि इससे पहले उन्हें अखिल भारतीय कांग्रेस समिति (एआईसीसी) मुख्यालय का प्रतिनिधि होने का दावा करने वाले किसी व्यक्ति का फोन आया था, जिसने जिले के दो विधायकों के संपर्क विवरण मांगे थे।
इसके बाद विधायक और सांसद ने प्रियंका गांधी के कार्यालय और कांग्रेस नेतृत्व से इस मामले की पुष्टि की, जिन्होंने स्पष्ट किया कि उनकी ओर से ऐसा कोई संदेश नहीं भेजा गया था। पार्टी नेतृत्व की सलाह पर श्री बालकृष्णन ने 11 जुलाई को साइबर पुलिस में शिकायत दर्ज करायी।
विधायक ने कहा कि उन्हें कॉल के दावों पर कभी भरोसा नहीं हुआ, क्योंकि मंत्री पद वित्तीय लेनदेन के जरिए तय नहीं होते हैं। उन्होंने हालांकि पुलिस से संपर्क करने का फैसला इसलिए किया ताकि इस धोखाधड़ी के पीछे के लोगों की पहचान करने में मदद मिल सके और भविष्य में जनप्रतिनिधियों एवं अन्य लोगों को धोखा देने के ऐसे प्रयासों को रोका जा सके।
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