तिरुवनंतपुरम , जुलाई 10 -- केरल के कोवलम में शुक्रवार को वार्षिक वैश्विक मधुमेह (डायबिटीज) सम्मेलन के 14वें संस्करण की शुरुआत हुई। इस तीन दिवसीय सम्मेलन में देश-विदेश के जाने-माने मधुमेह विशेषज्ञ, चिकित्सक, शोधकर्ता, पोषण विशेषज्ञ और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र से जुड़े पेशेवर हिस्सा ले रहे हैं।
'जोथीदेव प्रोफेशनल एजुकेशन फोरम' द्वारा आयोजित इस तीन दिवसीय सम्मेलन का मुख्य विषय 'देखभाल में सबसे बेहतर चुनने में आपकी मदद करना' है। इस आयोजन में मधुमेह की रोकथाम, पहचान और इसके प्रबंधन में सुधार लाने के उद्देश्य से आधुनिक उपचार पद्धतियों, नयी तकनीकों और व्यावहारिक नैदानिक रणनीतियों सहित कई समकालीन विषयों पर गहन चर्चा की जा रही है।
केरल के स्वास्थ्य मंत्री के. मुरलीधरन शनिवार को कोवलम के उदय समुद्र में इस सम्मेलन का औपचारिक रूप से उद्घाटन करेंगे। हालांकि, वैज्ञानिक सत्र और शैक्षणिक विचार-विमर्श पहले से ही शुरू हो चुके हैं। उद्घाटन समारोह के दौरान स्वास्थ्य मंत्री 'इंटरनेशनल जर्नल ऑफ डायबिटीज एंड टेक्नोलॉजी' के शोध पत्रों का विमोचन भी करेंगे।
मधुमेह देखभाल के क्षेत्र में देश के प्रमुख शैक्षणिक मंचों में से एक माने जाने वाले इस फोरम का उद्देश्य डॉक्टरों को वैज्ञानिक साक्ष्यों और व्यावहारिक चिकित्सा के समन्वय से इलाज के बदलते तरीकों को समझने में मदद करना है। भारत में मधुमेह की बढ़ती सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती को देखते हुए चिकित्सकों के बीच निरंतर चिकित्सा शिक्षा और ज्ञान साझा करने के लिए यह सम्मेलन अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
यह सम्मेलन डॉ. जोथीदेव केशवदेव (आयोजन सचिव), डॉ. अरुण शंकर (आयोजन अध्यक्ष), सुनीता जोथीदेव (सम्मेलन निदेशक), हरिप्रसाद (संयोजक) और अंजना बसंत (वैज्ञानिक समन्वयक) के नेतृत्व में आयोजित किया जा रहा है। इस वैज्ञानिक कार्यक्रम का खाका देश-विदेश के अग्रणी मधुमेह विशेषज्ञों की एक बहु-विषयक समिति की देखरेख में तैयार किया गया है।
तीन दिनों तक चलने वाले इस उच्च स्तरीय सम्मेलन में लगभग 2,500 स्वास्थ्य पेशेवर भाग ले रहे हैं, जो तीन अलग-अलग सभागारों में एक साथ चल रहे वैज्ञानिक सत्रों में अपने अनुभव और विचार साझा कर रहे हैं। इस सम्मेलन में सिंगापुर, ऑस्ट्रिया, नेपाल, मलेशिया, ओमान, संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और मिस्र के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ख्याति प्राप्त मधुमेह विशेषज्ञ और शोधकर्ता शामिल हो रहे हैं, साथ ही देश के विभिन्न अग्रणी स्वास्थ्य संस्थानों के 70 से अधिक प्रतिष्ठित राष्ट्रीय विशेषज्ञ भी हिस्सा ले रहे हैं।
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