नयी दिल्ली/तिरुवनंतपुरम , मई 12 -- केरल में यूनाइटेड डेमोक्रेटिक फ्रंट (यूडीएफ) की चुनावी जीत के बाद, राज्य के अगले मुख्यमंत्री के नाम को लेकर दिल्ली में सरगर्मियां तेज हो गई हैं और उम्मीद है कि कांग्रेस आलाकमान जल्द ही इस बारे में अंतिम निर्णय ले लेगा।

पार्टी के भीतर गुटबाजी और लॉबिंग इस वक्त अपने चरम पर है। कांग्रेस के बड़े नेता इस कोशिश में जुटे हैं कि नेतृत्व को लेकर काफी दिनों से चली आ रही इस कशमकश को जल्द से जल्द खत्म किया जाए।

सियासी हलचल के बीच कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एक विशेष जहाज से दिल्ली पहुँच रहे हैं और शाम को उनकी पार्टी के वरिष्ठ नेता राहुल गांधी के साथ एक बेहद अहम मुलाकात होनी है, जिसके बाद आधिकारिक घोषणा की उम्मीद जताई जा रही है। हालांकि, सूत्रों का कहना है कि आखिरी मुहर सोनिया गांधी के साथ मशवरे के बाद ही लगेगी। यह फैसला केरल के तमाम दिग्गज नेताओं पूर्व प्रदेश अध्यक्षों और कार्यकारी अध्यक्षों के साथ हुई लंबी बातचीत के बाद लिया जा रहा है।

मुख्यमंत्री की इस रेस में तीन बड़े नाम शामिल हैं वी.डी. सतीशन, के.सी. वेणुगोपाल और रमेश चेन्नीथला। आलाकमान इन तीनों नेताओं की लोकप्रियता, संगठन में उनकी पकड़ और राज्य के समीकरणों को तौल रहा है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यूडीएफ गठबंधन की एकता को बनाए रखने और अंदरूनी गुटबाजी को थामने की है।

यह बात भी जाहिर हुयी है कि श्री गांधी ने केरल के नेताओं से उन सार्वजनिक प्रदर्शनों और सोशल मीडिया कैंपेन पर कड़ा जवाब मांगा है, जो मुख्यमंत्री पद के लिए दबाव बनाने के मकसद से किए गए। उन्होंने सवाल उठाया कि नेतृत्व की हिदायत मिलते ही ये विरोध प्रदर्शन अचानक कैसे शांत हो गए? जहां कुछ नेता इसे जनता का 'खुद-ब-खुद निकला जोश' बता रहे हैं, वहीं आलाकमान को शक है कि ये सब सोची-समझी गुटबाजी का हिस्सा था।

वरिष्ठ नेता तिरुवनचूर राधाकृष्णन ने बताया कि बातचीत अब आखिरी दौर में है। वहीं, केपीसीसी अध्यक्ष सन्नी जोसेफ ने माना कि इस देरी से पार्टी की साख पर बुरा असर पड़ा है, लेकिन उन्हें उम्मीद है कि सोनिया गांधी के यहाँ चल रही गुफ्तगू का नतीजा अच्छा निकलेगा।

दूसरी ओर, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता श्री एम.एम. हसन ने साफ कर दिया कि मुख्यमंत्री चुनना कांग्रेस का अंदरूनी मामला है और इसमें गठबंधन के साथियों का दखल सीमित रहेगा। के. मुरलीधरन ने भी कहा कि फैसला लेते वक्त जनता की भावनाओं का ख्याल रखा जाएगा।

सियासी जानकारों का मानना है कि अगर के.सी. वेणुगोपाल को केरल की कमान दी जाती है, तो दिल्ली में कांग्रेस संगठन में बड़ा फेरबदल होगा। उनके मुख्यमंत्री बनने से एआईसीसी महासचिव का अहम पद खाली हो जाएगा, जिस पर भूपेश बघेल, सचिन पायलट या अजय माकन जैसे नेताओं की नजर है।

केरल के नवनिर्वाचित विधायकों ने पहले ही एक प्रस्ताव पास कर सारा फैसला आलाकमान पर छोड़ दिया है।

उधर, यूडीएफ की सहयोगी 'मुस्लिम लीग' ने भी इस देरी पर फिक्र जाहिर की है और कांग्रेस से जल्द फैसला लेने की गुजारिश की है।

वेणुगोपाल खेमे का तर्क है कि आलाकमान को विधायकों के समर्थन को ही तवज्जो देनी चाहिए। सतीशन समर्थकों की दलील है कि राज्य में उनके पक्ष में जबरदस्त माहौल है। श्री चेन्नीथला के समर्थकों का कहना है कि उनके साथ काम करने वाले जूनियर नेता आज कई राज्यों के मुख्यमंत्री हैं, ऐसे में उन्हें दरकिनार करना उनके साथ नाइंसाफी होगी।

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