तिरुवनंतपुरम , जून 06 -- केरल 2050 तक कार्बन-न्यूट्रल राज्य बनने का लक्ष्य लेकर चल रहा है। मुख्यमंत्री वी.डी. सतीशन ने दोहराया कि राज्य सरकार सभी विकास कार्यों में पर्यावरण संरक्षण और जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपायों को शामिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

श्री सतीशन शनिवार को कहा कि सरकार ऐसे विकास परियोजनाओं को आगे नहीं बढ़ाएगी जिनसे प्रकृति को नुकसान हो और वह संतुलित और टिकाऊ विकास पर ध्यान देना जारी रखेगी। उन्होंने कहा कि जहाँ भारत ने 2070 तक कार्बन न्यूट्रैलिटी हासिल करने का लक्ष्य रखा है, वहीं केरल इस लक्ष्य को दो दशक पहले ही हासिल करने की दिशा में काम कर रहा है और 2040 तक काफी प्रगति की उम्मीद है। जलवायु परिवर्तन को दुनिया की सबसे बड़ी चुनौती बताते हुए उन्होंने प्रकृति की चेतावनियों पर ध्यान देने और खराब मौसम की घटनाओं से निपटने की तैयारी मजबूत करने पर ज़ोर दिया। मुख्यमंत्री ने कहा कि मौसम की जो घटनाएं पहले मुख्य रूप से बंगाल की खाड़ी तक सीमित थीं, वे अब अरब सागर में भी तेजी से देखी जा रही हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि अचानक बादल फटने और बहुत ज्यादा बारिश होने जैसी घटनाएं कोच्चि और मुंबई जैसे शहरी इलाकों के लिए गंभीर खतरा पैदा कर सकती हैं। साथ ही पश्चिमी घाट में भूस्खलन का खतरा भी बढ़ा सकती हैं। "वन हेल्थ" (एक स्वास्थ्य) दृष्टिकोण के महत्व पर जोर देते हुए श्री सतीशन कहा कि केरल को ऐसी नीतियों को बढ़ावा देना चाहिए जो इंसानी सेहत और पर्यावरण की भलाई के बीच गहरे संबंध को पहचानती हों।

उन्होंने पर्यावरण संरक्षण पर पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के 1972 के ऐतिहासिक स्टॉकहोम भाषण को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल करने का सुझाव भी दिया और बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने केरल के 600 किलोमीटर लंबे समुद्र तट, 44 नदियों, झीलों और पश्चिमी घाट के पारिस्थितिकी तंत्र को बचाने की ज़रूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि कार्बन न्यूट्रैलिटी हासिल करना एक लंबा मिशन है जिसे पीढ़ियों तक जारी रखना होगा। मुख्यमंत्री ने विश्व पर्यावरण दिवस के राज्य-स्तरीय कार्यक्रम का उद्घाटन करते हुए ये बातें कहीं। कार्यक्रम के दौरान, उन्होंने "केरल कार्बन न्यूट्रल पाथवे 2050" दस्तावेज़ और राज्य की कचरा प्रबंधन सुविधाओं पर एक ऑडिट रिपोर्ट भी जारी की। इस मौके पर पद्म श्री पुरस्कार विजेता कोल्लायिल देवकी अम्मा को सम्मानित किया गया और मुख्यमंत्री ने पर्यावरण मित्र पुरस्कार भी प्रदान किए। यह कार्यक्रम पर्यावरण और जलवायु परिवर्तन निदेशालय, केरल राज्य विज्ञान, प्रौद्योगिकी और पर्यावरण परिषद (केएससीएसटीई) और केरल राज्य जैव विविधता बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित किया गया था।

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