त्रिशूर , अप्रैल 26 -- केरल के त्रिशूर शहर के मध्य में स्थित वडक्कुनाथन मंदिर परिसर में रविवार को प्रसिद्ध 'त्रिशूर पूरम' परंपरागत हर्षोल्लास के साथ शुरू हो गया। पर्व की शुरुआत कनिमंगलम शास्ता के अनुष्ठानों के साथ हुई। इसमें नौ सजे-धजे हाथियों और वाद्ययंत्रों के दल ने हिस्सा लिया। इसके बाद करमुक्कू भगवती और अय्यनथोल कार्त्यायनी मंदिरों के देवी-देवताओं का आगमन हुआ।

इस सप्ताह मुंदत्तिकोड आतिशबाजी भंडार में हुई दुर्घटना में 15 लोगों की जान जाने कइयों के घायल हो जाने के मद्देनजर अधिकारियों ने इस बार मुख्य आकर्षण 'आतिशबाजी' रद्द कर दी है। इसके अलावा प्रसिद्ध 'कुदामट्टम' (रंगीन छतरियों का आदान-प्रदान) की अवधि को भी सामान्य एक घंटे से घटाकर मात्र 15 मिनट कर दिया गया है।

आतिशबाजी और विस्तृत कुदामट्टम की अनुपस्थिति में इस वर्ष के पूरम उत्सव में वाद्ययंत्रों का दल केंद्रीय आकर्षण है। इस प्रतिष्ठित उत्सव की आत्मा माने जाने वाले थिरुवम्बाडी मंदिर का 'मदथिल वरवु पंचवाद्यम' और परमेक्कावु मंदिर का 'इलांजिथारा मेलम' को दोपहर तक आयोजित किए जाने का निर्णय किया गया है।

भव्य हाथी पूरम का एक अनिवार्य हिस्सा हैं और लगभग 100 गजराजों को इसके लिए कतारबद्ध किया गया। जीवंत वाद्य संगीत के साथ सजे-धजे हाथी देखने लायक दृश्य होते हैं। दोनों पक्ष सबसे भव्य हाथियों की प्रदर्शनी के लिए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं । राज्य के लगभग सभी दिग्गज हाथियों को इस पूरम में लाया गया है।

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