तिरुवनंतपुरम , मार्च 07 -- केरल उच्च न्यायालय ने भगवान श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर के वरिष्ठ सहायक प्रबंधक बबीलू शंकर की बर्खास्तगी को पलटते हुए मंदिर प्रशासन को उन्हें तुरंत बहाल करने का निर्देश दिया है।

न्यायमूर्ति एन. नरेश ने शंकर को नौकरी से हटाने को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन बताया और कहा कि यह निष्पक्ष जांच किए बिना किया गया था।

बबीलू शंकर ने 2023 में मंदिर के कामकाज में गड़बड़ियों की शिकायत दर्ज कराई थी। उनकी शिकायत के बाद मंदिर प्रबंधन ने उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की, जिसमें उन पर प्रशासनिक कमेटी के खिलाफ बेबुनियाद आरोप लगाने का आरोप लगाया गया। जांच पूरी होने से पहले ही उन्हें उनके पद से हटा दिया गया।

उल्लेखनीय है कि शंकर लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारी से पीड़ित थे। उन्होंने मेडिकल प्रमाण-पत्र जमा किए थे जिसमें कहा गया था कि वह काम पर नहीं आ सकते। प्रशासन ने हालांकि इन मेडिकल दस्तावेजों को नजरंदाज कर दिया। लगभग डेढ़ साल तक ड्यूटी से गैरहाजिर रहने के बाद मंदिर के अधिकारियों ने सेवा नियमों का हवाला देते हुए नौकरी से समाप्ति का आदेश जारी किया, जिसके मुताबिक अगर कोई कर्मचारी लगातार गैरहाजिर रहता है तो उसे हटाया जा सकता है।

उच्च न्यायालय ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी बर्खास्तगी के लिए सही कारण और सही नोटिस देना होगा, ताकि प्राकृतिक न्याय का पालन हो सके। इसने इस बात पर जोर दिया कि जानबूझकर गैरहाजिर रहने या प्रबंधन के प्रति बेइज्जती के दावे तब तक बदनाम करने वाले हैं जब तक कि पूरी जांच से साबित न हो जाएं।

न्यायालय ने यह भी कहा कि अदालत के पहले के निर्देश के बावजूद अधिकारियों ने याचिकाकर्ता का मेडिकल परीक्षण नहीं किया।

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