पालक्काड , अगस्त 22 -- केरल उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता को कोई अनुचित लाभ मिलने और उसके परिणामस्वरूप सरकारी खजाने को नुकसान होने की आशंका के प्रति आगाह करते हुए चुल्लियार बांध पर रखी गाद की सख्त नाप-जोख करने का निर्देश दिया है और आदेश दिया है कि वहां से केवल 2,25,830.17 घन मीटर ही गाद ही हटायी जाये।

यह आदेश 20 अगस्त को 'मेसर्स कूथराडन्स इन्फ्रास्ट्रक्चर एलएलपी बनाम केरल राज्य व अन्य' में पारित किया गया है। न्यायालय ने दर्ज किया कि याचिकाकर्ता और उत्तरदाता दोनों ही पक्षों ने इस बात को स्वीकार किया है कि इस समय मौके पर 2,25,830.17 घन मीटर गाद ही उपलब्ध है।

एहतियात के तौर पर, न्यायालय ने तीन अगस्त के अपने पिछले अंतरिम आदेश में संशोधन किया और निर्देश दिया कि संबंधित उत्तरदाता पालक्काड के जिला भूविज्ञानी की मौजूदगी में निकाली गयी गाद की नाप-जोख करें।

न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए पालक्काड के जिला भूविज्ञानी को मामले में अतिरिक्त पांचवें उत्तरदाता के रूप में शामिल किया है। इसके साथ ही अधिकारी को निर्देश दिया कि वे सही माप और अदालत के आदेशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए हर संभव सहयोग दें।

उच्च न्यायालय ने सख्त लहजे में आदेश दिया कि केवल 2,25,830.17 घन मीटर गाद ही हटायी जायेगी, इससे ज्यादा जरा-सा भी नहीं।

न्यायालय ने टिप्पणी की कि यह एहतियाती संशोधन इसलिए जरूरी था, ताकि याचिकाकर्ता को कोई नाजायज फायदा न मिले और न ही इसके नतीजे में राज्य के खजाने को कोई नुकसान पहुंचे।

इस निर्देश ने नाप-जोख और जांच को एक न्यायिक सुरक्षा चक्र बना दिया है, ताकि सरकारी राजस्व की रक्षा हो सके और चुल्लियार बांध परिसर से तय सीमा से अधिक गाद न हटायी जा सके।

अधिकारियों को आदेश का कड़ाई से पालन करने का निर्देश दिया गया है, साथ ही कहा गया है कि न्यायालय के निर्देशों के मुताबिक जांची-परखी गयी मात्रा से अधिक गाद ले जाने के लिए कोई ट्रांजिट पास, अनुमति या अन्य अधिकार पत्र जारी न किया जाए।

न्यायालय ने मामले की अगली सुनवाई के लिए 25 सितंबर 2026 की तारीख तय की है।

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