तिरुवनंतपुरम , फरवरी 25 -- नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) की एक रिपोर्ट में केरल के परिवहन, वन, लोक निर्माण, राजस्व और आबकारी विभागों में राजस्व संग्रह, कार्यक्रम क्रियान्वयन और विभागीय अनुपालन से जुड़ी गंभीर खामियों को उजागर किया गया है।
केरल विधानसभा में पेश इस रिपोर्ट में बताया गया है कि इन कमियों के कारण राज्य को भारी राजस्व नुकसान हुआ और प्रशासनिक स्तर पर भी कमजोरियां सामने आयी हैं। यह रिपोर्ट साल 2023 मार्च में समाप्त हुए वर्ष की है और इसे विधानसभा में पेश किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, 2022-23 में केरल की कुल राजस्व प्राप्तियां 1,32,724.66 करोड़ रुपए रहीं, जो इसे पहले साल के वर्ष की तुलना में 13.79 प्रतिशत अधिक हैं। इसमें से 87,086.12 करोड़ रुपए (66 प्रतिशत) राज्य के अपने राजस्व से प्राप्त हुए। इसके बावजूद प्रमुख राजस्व मदों में बकाया राशि 28,398.10 करोड़ रुपए रही, जो कुल राजस्व का 21.40 प्रतिशत है।
जीएसटी और वैट मामलों की ऑडिट में रिटर्न की जांच में देरी के कारण 103.67 करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान सामने आया। इसके अलावा, कानूनी अड़चनों और इनपुट टैक्स क्रेडिट के अनियमित दावों के चलते कई सौ करोड़ रुपये की कम वसूली हुई। परिवहन क्षेत्र में, 100 करोड़ रुपए से अधिक की सड़क सुरक्षा निधि केआरएस फंड खाते में अनुपयोगी पड़ी रही। वाहन उपकर और शुल्क के हस्तांतरण में देरी के कारण 27,930.88 लाख रुपए की कमी दर्ज की गयी। जुर्माने, अतिरिक्त शुल्क और सेवा शुल्क की वसूली न होने से भी राजस्व को नुकसान हुआ। केरल राज्य परिवहन परियोजना चार वर्ष बाद भी 32.27 करोड़ रुपए मिलने के बाद भी विफल रही।
वन प्रबंधन और सागौन रोपण कार्यों में भी गंभीर प्रक्रियागत खामियां पायी गयीं, जिनमें कार्य योजनाओं का पालन न करना, रखरखाव की कमी, पतलापन और कीट हमलों की अपर्याप्त निगरानी शामिल है। इससे राजस्व और संसाधन प्रबंधन दोनों प्रभावित हुए।
लोक निर्माण और आबकारी विभागों में लागत सूचकांक लागू न करना, आबकारी और मादक पदार्थ तस्करी मामलों की जांच में देरी, 1,596 मामलों में कानूनी प्रावधान लागू न करना तथा लाइसेंस और परमिट शुल्क में कमी जैसी खामियां सामने आईं।
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