तिरुवनंतपुरम , अक्टूबर 21 -- नौ दिवसीय नवरात्र उत्सव के समापन का प्रतीक 'विजयादशमी' के अवसर पर बुधवार को पूरे केरलम के मंदिरों, सांस्कृतिक संस्थानों और समाचार पत्र कार्यालयों में पारंपरिक 'विद्यारंभम' समारोह का आयोजन किया गया, जहां हजारों बच्चों को अक्षर ज्ञान और शिक्षा की दुनिया में प्रवेश कराया गया।

प्रमुख मंदिरों और साहित्यिक स्मारकों से लेकर समाचार पत्र प्रतिष्ठानों तक, परिवार अपने बच्चों के साथ इस शुभ समारोह के लिए एकत्र हो रहे हैं, जो औपचारिक शिक्षा की शुरुआत का प्रतीक है।

कोट्टायम का पानाचिक्कड़ सरस्वती मंदिर (जिसे 'दक्षिण मूकांबिका' के नाम से जाना जाता है), मलप्पुरम जिले के तिरूर स्थित थुंचन परम्बू, एर्नाकुलम का चोट्टानिक्कारा भगवती मंदिर, त्रिशूर के गुरुवायुर श्रीकृष्ण मंदिर और तिरुवल्लाक्कावु मंदिर इस वार्षिक आयोजन के प्रमुख केंद्रों में शामिल हैं।

पड़ोसी राज्य कर्नाटक के कोल्लूर स्थित प्रसिद्ध मूकांबिका मंदिर भी मलयाली परिवारों के लिए बच्चों को शिक्षा में प्रवेश कराने का एक बड़ा केंद्र है। मां सरस्वती को समर्पित पानाचिक्कड़ मंदिर में विजयादशमी के दौरान भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं, जहां शिक्षकों और विद्वानों के मार्गदर्शन में समारोह के लिए विशेष व्यवस्था की जाती है।

तिरुवनंतपुरम में पूजाप्पुरा सरस्वती मंदिर, आट्टुकल भगवती मंदिर, आर्यशाला भगवती मंदिर, चेंथिट्टा भगवती मंदिर और करिक्काकोम चामुंडी मंदिर सहित कई प्रमुख मंदिरों में विद्यारंभम आयोजित किया जा रहा है। कोट्टाक्काकम स्थित नवरात्र मंडपम और श्री पद्मनाभस्वामी मंदिर का व्यास मंदिर भी इस आयोजन से जुड़े हुए हैं।

इसके अलावा एर्नाकुलम जिले के परावूर दक्षिण मूकांबिका मंदिर और अवनमकोड़ सरस्वती मंदिर के साथ-साथ त्रिशूर, कोझिकोड, पलक्कड़, कन्नूर और अन्य जिलों के कई मंदिर भी मुख्य केंद्रों में शामिल हैं।

आधुनिक मलयालम साहित्य के जनक माने जाने वाले थुंचत्तु एझुथाचन का स्मारक 'थुंचन परम्बू' इस समारोह के सबसे प्रमुख स्थलों में से एक है। इस स्मारक पर बच्चों को पारंपरिक रूप से उनके पहले अक्षर लिखाए जाते हैं, जहां राज्य के विभिन्न हिस्सों से परिवार और सांस्कृतिक हस्तियां जुटती हैं।

समाचार पत्रों के कार्यालय भी विद्यारंभम के महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरे हैं, जो बच्चों को साहित्य, विज्ञान, शिक्षा, लोक प्रशासन, चिकित्सा और कला जगत की प्रतिष्ठित हस्तियों के संपर्क में लाते हैं।

'मलयाला मनोरमा' ने राज्यभर में अपनी 11 इकाइयों के अलावा नयी दिल्ली, मुंबई, बेंगलुरु, चेन्नई और दुबई के केंद्रों में समारोह आयोजित किए हैं, जिससे राज्य से बाहर और विदेशों में रहने वाले मलयाली परिवारों तक इस परंपरा का विस्तार हुआ है।

समाचार पत्र की तिरुवनंतपुरम इकाई में फिल्म निर्माता अदूर गोपालकृष्णन, लेखक जॉर्ज ओनाक्कूर, पूर्व पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) जैकब पुन्नोस, लोक निर्माण विभाग की विशेष सचिव आदिल अब्दुल्ला और जादूगर गोपीनाथ मुथुकाड बच्चों का मार्गदर्शन करने वाली प्रमुख हस्तियों में शामिल हैं।

कोल्लम इकाई में वैदिक विद्वान नीलमना वी.आर. नंबूथिरी, गायक जी. वेणुगोपाल, वैज्ञानिक व अकादमिक हस्तियों तथा गीतकार राजीव अलुंकल जैसी शख्सियतें शामिल हैं। कोट्टायम में भाग लेने वाली हस्तियों में लेखक मनोज कुरूर, लेखिका श्रीपार्वती और कई विद्वान शामिल हैं।

कोच्चि में नीदरलैंड में भारत के पूर्व राजदूत वेणु राजामणि, अपर पुलिस महानिदेशक (एडीजीपी) पी. विजयन, भागवत विद्वान वेण्मणि कृष्णन नंबूथिरीप्पाड तथा संगीतकार एवं कृषि वैज्ञानिक श्रीवत्सन जे. मेनन इस कार्यक्रम से जुड़े हैं।

त्रिशूर इकाई में वाद्ययंत्र वादक पेरुवनम कुट्टन मारार और पूर्व मुख्य सचिव ईके भारत भूषण जैसी हस्तियां शामिल हैं। पलक्कड़ में यह जिम्मेदारी थायम्बाका वादक कल्लूर रामनकुट्टी मारार और साहित्यिक आलोचक आशा मेनन संभाल रहे हैं।

मलप्पुरम में कालीकट विश्वविद्यालय के कुलपति पी रवींद्रन और अन्य प्रमुख हस्तियां बच्चों का मार्गदर्शन कर रही हैं। कोझिकोड में लेखक कल्पेट्टा नारायणन, अंबिकासुथन मांगड और शीला टॉमी तथा कन्नूर में प्रसिद्ध लेखक टी पद्मनाभन, एम मुकुंदन और सीवी बालकृष्णन समारोह से जुड़े हैं।

केरल के बाहर आयोजित कार्यक्रमों में बेंगलुरु में लेखिका अनीता नायर, चेन्नई में हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ वीवी बाशी और संगीत निर्देशक शरथ, तथा दुबई में एस्टर डीएम हेल्थकेयर के अध्यक्ष व प्रबंध निदेशक आजाद मूपेन एवं भारतीय महावाणिज्य दूत ई विष्णु वर्धन रेड्डी भाग ले रहे हैं।

'केरल कौमुदी' ने भी तिरुवनंतपुरम के वेणपालवट्टम श्री भगवती मंदिर समिति के साथ संयुक्त रूप से विद्यारंभम समारोह आयोजित किया है। इसके लिए वीएसएससी के पूर्व निदेशक एम. चंद्रदाथन, न्यूरोसर्जन एम. मार्तंड पिल्लई, केरल राज्य उच्च शिक्षा परिषद के उपाध्यक्ष अच्युतशंकर एस. नायर, गायिका राजलक्ष्मी और व्यवसायी बीजू रमेश को आचार्य के रूप में नामित किया गया है।

विद्यारंभम (जिसे 'एझुथिनिरुथु' भी कहा जाता है) के तहत पारंपरिक रूप से गुरु या शिक्षक के मार्गदर्शन में चावल के दानों से भरी थाली में बच्चों से उनके पहले अक्षर लिखवाए जाते हैं। इस अनुष्ठान की शुरुआत आमतौर पर बच्चे की शैक्षणिक यात्रा के लिए आशीर्वाद मांगते हुए 'हरि श्री गणपति नमः' मंत्र के उच्चारण के साथ होती है। कुछ परंपराओं में सोने की अंगूठी से बच्चे की जीभ पर प्रतीकात्मक रूप से पहला अक्षर उकेरा जाता है। यह समारोह ज्ञान, बुद्धि, संगीत और कला की देवी मां सरस्वती से जुड़ा हुआ है। यह परंपरा केवल औपचारिक स्कूली शिक्षा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसके जरिए बच्चों को संगीत, नृत्य और अन्य कला विधाओं में भी दीक्षित किया जाता है। यह परंपरा शिक्षा और सांस्कृतिक सीख के प्रति केरल के दीर्घकालिक दृष्टिकोण को दर्शाती है।

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