रांची , सितंबर 15 -- झारखंड विधानसभा के अध्यक्ष रबींद्रनाथ महतो ने कहा कि दुनिया में हर छह में से एक व्यक्ति किसी न किसी रूप में दिव्यांगता के साथ जीवन जी रहा है।

ऐसे में सुगमता को केवल सुविधा के तौर पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र के आधार के रूप में देखा जाना चाहिए।

69वां राष्ट्रमंडल संसदीय संघ सम्मेलन 13 से 19 सितंबर 2026 तक दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन में आयोजित किया जा रहा है।

सम्मेलन में झारखंड राष्ट्रमंडल संसदीय संघ शाखा की ओर से झारखंड विधानसभा अध्यक्ष रवीन्द्रनाथ महतो डेलीगेट के रूप में तथा विधायक मथुरा प्रसाद महतो और दशरथ गागराई ऑब्जर्वर के रूप में भाग ले रहे हैं।

सम्मेलन में मंगलवार को वर्कशॉप-बी में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष श्री महतो ने 'सुलभ संसद: विकलांग लोगों के लिए समावेश' विषय पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजन लोकतंत्र में केवल लाभार्थी या अतिथि नहीं हैं, बल्कि वे नागरिक, मतदाता, प्रतिनिधि, नेता और निर्णयकर्ता हैं। जब संसद और लोकतांत्रिक संस्थाएं सभी लोगों के लिए सुलभ होती हैं, तब लोकतंत्र और अधिक मजबूत होता है।

अपने संबोधन में झारखंड विधानसभा अध्यक्ष ने भारत में दिव्यांग नागरिकों की सुविधा और लोकतांत्रिक भागीदारी बढ़ाने के लिए किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिव्यांगजनों के लिए पहचान और सरकारी योजनाओं तक पहुंच आसान बनाने के उद्देश्य से यूनिक डिसएबिलिटी आईडी (यूडीआईडी) प्रणाली लागू की गई है। मार्च 2026 तक देश में 1.34 करोड़ से अधिक विशिष्ट दिव्यांगता पहचान पत्र जारी किए जा चुके हैं।

उन्होंने सुगम्य भारत अभियान का उल्लेख करते हुए कहा कि इसके माध्यम से भौतिक और संस्थागत बाधाओं को कम करने का प्रयास किया जा रहा है। चुनाव प्रक्रिया में दिव्यांग मतदाताओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए घर से मतदान, व्हीलचेयर, परिवहन और स्वयंसेवक सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। उन्होंने डिजिटल पहुंच को भी नागरिकों के अधिकार के रूप में महत्व दिए जाने की बात कही।

श्री महतो ने कहा कि दुनिया में हर छह में से एक व्यक्ति किसी न किसी रूप में दिव्यांगता के साथ जीवन जी रहा है। ऐसे में सुगमता को केवल सुविधा के तौर पर नहीं, बल्कि लोकतंत्र के आधार के रूप में देखा जाना चाहिए।

उन्होंने भारत के दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम, 2016 के तहत मान्य 21 प्रकार की दिव्यांगताओं के संबंध में भी सम्मेलन में जानकारी साझा की। साथ ही झारखंड में वर्ष 2024 के निर्वाचन के दौरान दिव्यांग मतदाताओं के लिए घर से मतदान की सुविधा और मतदान केंद्र तक पहुंचाने के लिए वाहन उपलब्ध कराने जैसी व्यवस्थाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक संस्थाओं को अधिक समावेशी बनाने के लिए ऐसी व्यवस्थाओं को लगातार मजबूत किया जाना आवश्यक है।

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