पन्ना , अगस्त 22 -- मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा है कि राष्ट्रीय महत्व की केन-बेतवा लिंक परियोजना बुंदेलखंड के विकास में मील का पत्थर साबित होगी और इससे क्षेत्र में सिंचाई, पेयजल और ऊर्जा के क्षेत्र में व्यापक बदलाव आएगा।

उन्होंने कहा कि विकास के साथ प्रभावित और विस्थापित परिवारों के हितों का पूरा ध्यान रखना सरकार की प्राथमिकता है।

डॉ यादव पन्ना एवं छतरपुर में अधिकारियों की बैठक में बोल रहे थे। उन्होंने जिला प्रशासन को निर्देश दिए है कि प्रभावित गांवों में अधिकारी घर-घर पहुंचकर परिवारों की वास्तविक स्थिति और समस्याओं को समझें। विशेष रूप से आदिवासी परिवारों की कठिनाइयों को संवेदनशीलता के साथ सुनकर उनका प्राथमिकता से निराकरण कराया जाए।

उन्होंने कहा कि विस्थापित परिवारों को शासन की पात्र योजनाओं का लाभ उनके घर तक पहुंचाया जाए। जहां परिवारों ने नए स्थान पर निवास बना लिया है, वहां स्कूल, आंगनबाड़ी, स्वास्थ्य केंद्र, सामुदायिक भवन सहित जरूरी मूलभूत सुविधाओं के लिए ठोस कार्ययोजना तैयार की जाए।

उन्होंने पन्ना की रूँझ-मझगांव परियोजना में स्वीकृत अतिरिक्त राशि का प्रभावितों को शीघ्र भुगतान करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन प्रभावितों के पास उम्र संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं, उनकी आयु का निर्धारण मेडिकल परीक्षण के आधार किया जाए।

बैठक में मुख्यमंत्री ने वीडियो कॉन्फ्रेसिंग से जुड़े जल संसाधन मंत्री तुलसीराम सिलावट को परियोजना की उच्च प्राथमिकता के साथ गांव-गांव नियमित मॉनिटरिंग करने तथा संबंधित विभागों के बीच बेहतर समन्वय सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में जन चौपाल और जागरूकता यात्राओं के माध्यम से लोगों को परियोजना से मिलने वाले लाभों की जानकारी दी जाए। मैदानी स्तर पर सकारात्मक गतिविधियां आयोजित कर लोगों की आशंकाओं और समस्याओं का समाधान किया जाए।

उन्होंने बताया कि परियोजना पूर्ण होने पर मध्यप्रदेश में लगभग 8.11 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई क्षमता बढ़ेगी और 44 लाख से अधिक लोगों को पेयजल सुविधा का लाभ मिलेगा। परियोजना के तहत 103 मेगावाट जल विद्युत तथा 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन भी प्रस्तावित है।

बुंदेलखंड एवं मध्य भारत के पन्ना, दमोह, छतरपुर, टीकमगढ़, निवाड़ी, सागर, विदिशा, रायसेन, शिवपुरी और दतिया जिलों के 1,382 गांवों को इसका प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि केन-बेतवा लिंक परियोजना केवल जल संसाधन विकास की योजना नहीं, बल्कि बुंदेलखंड में आर्थिक और सामाजिक बदलाव का माध्यम है। सरकार का प्रयास है कि परियोजना से प्रभावित परिवारों का पुनर्वास सम्मान जनक ढंग से हो और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ा जाए।

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