नयी दिल्ली , मई 01 -- कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) को फिर से शुरू करने और श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी बढ़ाने की मांग की है।

श्री खरगे ने शुक्रवार को सोशल मीडिया एक्स पर लिखा कि बढ़ती बेरोजगारी सरकार की नीतियों का परिणाम है और सरकार ने जो श्रम संहिता लागू की है उससे कामगारों की स्थिति कमजोर हुई है। इसके अलावा ठेका श्रमिक व्यवस्था तथा 'हायर एंड फायर' जैसी नीतियों को बढ़ावा दिया गया है। उन्होंने कहा कि इन श्रम कानूनों की समीक्षा की जानी चाहिए।

कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि मनरेगा को कमजोर कर दिया गया है और मजदूरी के खर्च का बड़ा हिस्सा राज्यों पर डाल दिया गया है, जिससे राज्यों के लिए योजना को प्रभावी ढंग से चलाना कठिन हो गया है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों के कारण श्रमिकों को असंगठित और गिग कार्य की ओर धकेला जा रहा है, जहां बड़ी संख्या में लोग न्यूनतम मजदूरी से कम पर काम करने को मजबूर हैं। उन्होंने कहा कि महंगाई को ध्यान में रखा जाये तो पिछले वर्षों में मजदूरी वृद्धि बहुत कम रही है।

श्री खरगे ने शिक्षित युवाओं में बढ़ती बेरोजगारी पर भी चिंता जताई और कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के विनिवेश तथा सरकारी रिक्त पदों को न भरने से रोजगार के अवसर घटे हैं।

कांग्रेस ने कामगारों के हित में पांच प्रमुख मांगें दोहराईं। इनमें मनरेगा को पुनः लागू कर शहरी क्षेत्रों तक विस्तार करना, राष्ट्रीय न्यूनतम मजदूरी 400 रुपये प्रतिदिन निर्धारित करना, श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य अधिकार कानून लागू करना, असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए जीवन और दुर्घटना बीमा उपलब्ध कराना तथा रोजगार में ठेकेदारी व्यवस्था पर रोक लगाने के साथ नए श्रम कोड की समीक्षा करना शामिल है।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित