लखनऊ , जुलाई 15 -- किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के छात्रावासों में मांस पकाने पर रोक लगाने के फैसले का कांग्रेस ने विरोध किया है।
पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं प्रदेश प्रवक्ता अंशू अवस्थी ने बुधवार को कहा कि किसी व्यक्ति के खान-पान और रहन-सहन को नियंत्रित करने का किसी सरकार या संगठन को अधिकार नहीं है। केजीएमयू प्रशासन का यह निर्णय तानाशाहीपूर्ण और असंवैधानिक है। भाजपा और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) को लोगों के व्यक्तिगत जीवन और खान-पान में हस्तक्षेप करने का कोई अधिकार नहीं है।
कांग्रेस प्रवक्ता ने कहा कि एक ओर भारत दुनिया के प्रमुख मांस निर्यातक देशों में शामिल है, वहीं दूसरी ओर छात्रों के खान-पान पर प्रतिबंध लगाए जा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कुछ नेता और मंत्री मांस निर्यात के कारोबार से जुड़े होने के बावजूद देश के भीतर लोगों के खान-पान पर पाबंदियां लगाने की बात करते हैं, जो दोहरा मापदंड है। उन्होने भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी को पहले अपने नेताओं के बयानों पर जवाब देना चाहिए।
उन्होंने असम के मुख्यमंत्री के एक कथित बयान और केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू के गौमांस संबंधी बयान का उल्लेख करते हुए कहा कि भाजपा इस मुद्दे पर दोहरी नीति अपना रही है। उन्होंने मांग की कि केजीएमयू प्रशासन छात्रावासों में मांस पकाने पर रोक संबंधी अपने फैसले पर पुनर्विचार करे और छात्रों के संवैधानिक अधिकारों का सम्मान सुनिश्चित करे।
ग़ौरतलब है कि केजीएमयू के चीफ प्रोवोस्ट प्रो. कमल कुमार सावलानी ने 15 जुलाई 2026 को जारी आदेश में विश्वविद्यालय के सभी छात्रावासों की मेस और कैंटीन में मांसाहारी भोजन पकाने और परोसने पर तत्काल प्रभाव से रोक लगाने के निर्देश दिए हैं।
आदेश के अनुसार, कुलपति के मौखिक निर्देशों के अनुपालन में सभी प्रोवोस्ट यह सुनिश्चित करेंगे कि छात्रावासों की मेस एवं कैंटीन में मांसाहारी भोजन न पकाया जाए और न ही परोसा जाए। छात्रों को पर्याप्त प्रोटीन उपलब्ध कराने के लिए शाकाहारी प्रोटीन स्रोतों का समुचित उपयोग करने के भी निर्देश दिए गए हैं।
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