नयी दिल्ली , मई 15 -- दिल्ली प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा ने कहा है कि दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायधीश स्वर्ण कांता शर्मा के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल पर अवमानना का मुकदमा दायर करने के बाद आबकारी नीति से संबंधित मामले की सुनवाई छोड़ने के निर्णय को उनकी आदर्श न्यायिक कार्य पद्धति तथा उच्च व्यक्तिगत आचरण का प्रमाण बताया है।
श्री सचदेवा ने शुक्रवार को यहां संवाददाताओं से बातचीत करते हुए कहा कि न्यायधीश शर्मा की अनेक चेतावनियों के बाद भी जब श्री केजरीवाल तथा अन्य "आप" नेता सोशल मीडिया का दुरुपयोग करके तथा भाषणों में उन पर अनुचित आरोप लगाते रहे, तब अपने निजी तथा पारिवारिक सम्मान की रक्षा के लिए उनके पास श्री केजरीवाल पर अवमानना का मुकदमा दायर करने के आलावा कोई विकल्प नही बचा था।
उन्होंने कहा कि ऐसे में जब न्यायधीश शर्मा ने स्वयं उनकी अदालत में चल रहे एक मुकदमे के आरोपी केजरीवाल पर अवमानना का मुकदमा दर्ज कर किया, तो उनके पास लगा मुख्य मुकदमा छोड़ कर उच्च न्यायिक परम्पराओं का सम्मान रखना चाहिए।
उन्होंने कहा कि न्यायधीश शर्मा द्वारा केजरीवाल पर अवमानना का मुकदमा दायर करने के बाद खुद को श्री केजरीवाल पर भ्रष्टाचार के मूल मुकदमे से अलग करने को "सत्यमेव जयते" कह कर अपनी जीत बताना हास्यास्पद है, काश श्री केजरीवाल समझते कि अब उन पर एक की जगह दो मुकदमे चलेंगे और जब उनको न्यायाधीश की अवमानना की सज़ा होगी तो वो भ्रष्टाचार के मामले की सजा से भी बड़ा अपमान होगा।
श्री सचदेवा ने कहा कि श्री केजरीवाल द्वारा बार बार न्यायालय की अवमानना करके माननीय न्यायाधीश को हटने के लिए बाध्य करने को "सत्यमेव जयते" कह कर अपनी विजय के रूप में दर्शाना "सत्यमेव जयते" जैसे पवित्र संवैधानिक शब्दों का अपमान भी है।
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