भुवनेश्वर , अक्टूबर 25 -- केंद्र सरकार ने राष्ट्रीय शहरी सम्मेलन 2026 में व्यापक शहरी सुधारों, शहरी स्थानीय निकायों को अधिक स्वायत्तता देने और नगर निकायों की वित्तीय स्थिति मजबूत करने का आह्वान किया है। इसका मुख्य उद्देश्य शहरों को सशक्त बनाना है, ताकि वे 'विकसित भारत 2047' की दिशा में देश के विकास को गति दे सकें।

भुवनेश्वर में आयोजित दो दिवसीय इस सम्मेलन में केंद्र और राज्य सरकारों, शहरी स्थानीय निकायों, उद्योग जगत, शिक्षाविदों और विभिन्न संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल हुए। उन्होंने शहरी चुनौतियों पर चर्चा की और शासन, योजना, बुनियादी ढांचे तथा नागरिक सेवाओं में सुधार के लिए व्यावहारिक सुझाव तैयार किए।

केंद्रीय आवास और शहरी मामलों के मंत्री मनोहर लाल ने समापन सत्र को संबोधित करते हुए रविवार को 'अमृत', 'स्वच्छ भारत मिशन-शहरी' और 'पीएम स्वनिधि' जैसी प्रमुख योजनाओं के तहत हुई प्रगति का जिक्र किया। उन्होंने बताया कि इन योजनाओं से बुनियादी सेवाओं का विस्तार हुआ है, कचरा प्रबंधन में सुधार आया है, शहरी आवागमन मजबूत हुआ है और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला है।

उन्होंने रोजगार केंद्रों और सार्वजनिक परिवहन के पास किफायती आवास उपलब्ध कराने, निर्माण कार्यों में पुन: उपयोग आधारित तरीकों को अपनाने और पुराने कचरे के वैज्ञानिक निपटान की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि देश के आधे से अधिक पुराने कचरे का निपटान किया जा चुका है। उन्होंने इसके साथ ही नये कचरे के जमाव को रोकने और सतत शहरी विकास सुनिश्चित करने के लिए निरंतर प्रयासों का आह्वान किया। नीति आयोग के सदस्य राजीव गौबा ने शहरी स्थानीय निकायों को अधिक प्रशासनिक शक्तियां और वित्तीय संसाधन देकर छोटे शहरों को सशक्त बनाने पर जोर दिया। उन्होंने नगर निकायों की जवाबदेही बढ़ाने, उनके अपने राजस्व स्रोतों को बेहतर ढंग से जुटाने और शहरी नियोजन में व्यापक सुधार करने की बात कही, ताकि भारत में तेजी से हो रहे शहरीकरण की चुनौतियों से निपटा जा सके।

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