नयी दिल्ली , अप्रैल 01 -- राज्य सभा में केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बल (सामान्य प्रशासन) विधेयक 2026 पर आज दूसरे दिन की चर्चा में विपक्ष ने इस विधेयक को इन बलों के काडर के अधिकारियों के प्रोन्नति के अवसरों को सीमित करने वाला बताते हुए इसे वापस लिए जाने की मांग को दोहराया जबकि सत्ता पक्ष ने कहा कि विधेयक इन बलों की सामान्य प्रशासनिक व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण सुधार है और इसमें न्यायालय के निर्देशों और सुरक्षा की जरूरतों का पूरा ध्यान रखा गया है।
विधेयक पर दूसरे दिन की चर्चा शुरू करते हुए तृणमूल कांग्रेस के साकेत गोखले ने कहा कि सिविल पुलिस और अर्धसैनिक बलों के कार्य की प्रकृति अलग अलग है। दोनों के लिए परीक्षा देने वालों की सोच अलग-अलग होती है और जब काेई संघ लोक सेवा आयोग की परीक्षा पास कर आईपीएस संवर्ग का चयन करता है तो वह सिविल पुलिस में काम करना चाहता है। इसके विपरीत केंद्रीय बल सीमावर्ती क्षेत्र में सुरक्षा का काम करते हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्रीय पुलिस बलों का अधिकारी 17-18 साल की सेवा के बाद कमांडेट होता है जो सिविल पुलिस के अधीक्षक के रैंक का होता है। एक आईपीएएस इसी दौरान डीआईजी रैंक का होता है। उन्होंने इन बलों में आईपीएस अधिकारियों की प्रतिनियुक्ति को इनके काडर के अधिकारियों के साथ एक अन्याय बताते हुए सवाल किया कि क्या कभी कमांडेट को सिविल पुलिस में पुलिस अधीक्षक बनाया गया है?श्री गोखले ने कहा कि यह विधेयक आईपीएस अधिकारियों के लिए पार्किंग का अवसर बढ़ाने का माध्यम है। उन्होंने कहा कि सरकार को इस विधेयक को वापस ले कर केंद्रीय पुलिस बलों के कर्मियों के कल्याण पर ध्यान देना चाहिए।
भाजपा के सदस्य और पूर्व आईपीएस अधिकारी ने कहा कि बृज लाल वर्मा ने कहा कि अखिल भारतीय सेवाएं देश की एकता और अखंडता के लिए बनायी गयी है। आईपीएस हो, राज्य पुलिस हों और सशस्त्र पुलिस बलों-इन सभी संगठनों के जवानों ने देश के लिए कुर्बानी दी हैं। सबने कंधा से कंधा मिला कर काम किया है। उन्होंने कहा , ' मैं खुद लड़ा हूं, फरवरी में 1981 में मेरी जीप पर हमला किया गया था जिसमें मैं भी शहीद हो जाता।"आईपीएस अधिकारी हमेशा डेप्यूटेशन पर रहते हैं और समन्वय के लिए जरूरी भी है । आज जो नया अधिनियम बन रहा है उसमें केंद्रीय बलों में आईपीएस का कोटा निर्धारित किया गया है और इसमें न्यायालय के निर्देशों, इन बलों के काडर के अवसरों का ध्यान रखा गया है। उन्होंने कहा कि हर राज्य के पुलिस बलों में भी अधीक्षक रैंक के 67 प्रतिशत पदों पर आईपीएस ही नियुक्त किये जाते हैं केवल 33 प्रतिशत काडर से प्रोन्नत किये गये अधिकारी होते है।
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