नयी दिल्ली , जून 16 -- केंद्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ने भारतीय ज्ञान परंपरा, संस्कृत और भारतीय भाषाओं को आधुनिक तकनीक से जोड़ते हुए 'बी.टेक. इन आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एंड डेटा साइंस' (संस्कृत और भारतीय भाषाओं के समन्वय के साथ विशेष पाठ्यक्रम) की शुरुआत की है।
विश्वविद्यालय ने इस पाठ्यक्रम की शुरूआत नासिक स्थित अपने पंचवटी परिसर से की है। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्रीनिवास वरखेड़ी ने कार्यक्रम का वर्चुअल उद्घाटन किया।
कुलपति ने इस अवसर पर कहा कि भारत को वैश्विक स्तर पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के क्षेत्र में आगे बढ़ाने के लिए अपनी भाषाई विरासत को आधुनिक तकनीकी नवाचारों से जोड़ना बेहद जरूरी है। उन्होंने जोर देकर कहा, "अब समय आ गया है कि संस्कृत को केवल एक भाषा के नजरिए से न देखकर विज्ञान की दृष्टि से भी समझा जाये।"श्री वरखेड़ी ने कहा कि संस्कृत के लिए एक नया बौद्धिक विमर्श विकसित करना आवश्यक है, जिससे विज्ञान, तकनीक और ज्ञान-निर्माण में संस्कृत शास्त्रों के योगदान को फिर से स्थापित किया जा सके। उन्होंने कहा कि संस्कृत की शास्त्रीय परंपरा को 'आन्वीक्षिकी', 'त्रयी', 'वार्ता' और 'दंडनीति' के व्यापक ज्ञान-वर्गीकरण के आधार पर नये सिरे से परिभाषित करने की आवश्यकता है, जिससे भविष्य में इसके सकारात्मक और दूरगामी परिणाम देखने को मिलेंगे।
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