देहरादून , जनवरी 13 -- केंद्रीय जल शक्ति मंत्री सीआर पाटिल ने मंगलवार को उत्तराखंड के देहरादून स्थित भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्लूआईआई) परिसर में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केन्द्र और गंगा भवन का लोकार्पण किया। कार्यक्रम के दौरान उन्होंने डॉल्फिन रेस्क्यू वैन को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया जो गंगा में जलीय जीवों के संरक्षण एवं आपदाकालीन बचाव कार्यों को सुदृढ़ करेगी।

श्री पाटिल द्वारा गंगा भवन प्रांगण में "एक पेड़ मां के नाम" अभियान के अन्तर्गत पौधारोपण भी किया गया। इस अवसर पर संस्थान द्वारा प्रकाशित महत्वपूर्ण प्रकाशनों का विमोचन किया गया।

श्री पाटिल ने गंगा सभागार में एमएससी के विद्यार्थियों, शोधर्थियों एवं परियोजना प्रतिनिधियों के साथ संवाद कार्यक्रम में गंगा नदी को भारत की सांस्कृतिक, पारिस्थितिकी एवं आर्थिक जीवन रेखा बताते हुए कहा कि नदी की स्वच्छता एवं जैवविविधता का संरक्षण राष्ट्रीय प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि आज भारतीय वन्यजीव संस्थान के इस प्रतिष्ठित परिसर में राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केन्द्र तथा गंगा जलीय जीव संरक्षण एवं अनुश्रवण केन्द्र का लोकार्पण किया जा रहा है जो भारत में नदी संरक्षण, जल संसाधन प्रबंधन और जैव-विविधता संवर्द्धन के राष्ट्रीय प्रयासों में एक नई दिशा और नई ऊर्जा का संचार करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि इस परिसर से प्रारम्भ हुए ये अभिनव प्रयास नई ऊंचाइयों को छुएंगे और हमारी सिमटती जैव विविधता के सुरक्षित भविष्य को सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नदी अनुसंधान केन्द्र के सफल एवं उज्जवल भविष्य की कामना करता हूँ और भारतीय वन्यजीव संस्थान एवं इस से जुड़े सभी वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्ताओं एवं विद्यार्थियों को इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय दायित्व के लिए बधाई देता हूं।

इसके पश्चात श्री पाटिल ने स्थानीय समुदाय के प्रतिनिधि गंगा प्रहरियों के साथ संवाद किया गया और उनके द्वारा नदी एवं जलीय जीवों के संरक्षण के लिये किये जा रहे कार्यों के बारे में चर्चा की। इस दौरान इंडियन स्किमर संरक्षण परियोजना का औपचारिक शुभारम्भ तथा कछुआ संरक्षण परियोजना के बारे में भी जानकारी दी गई। कार्यक्रम के दौरान अन्य अतिथियों एवं आईयूसीएन के प्रतिनिधियों ने भी अपने विचार साझा किए। केंद्रीय मंत्री ने केन्द्र परिसर स्थित विभिन्न प्रयोगशालाओं का भ्रमण किया और वहां संचालित वैज्ञानिक अनुसंधान कार्यों की जानकारी प्राप्त की।

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