गुरुग्राम (हरियाणा) , मार्च 13 -- एशिया और अफ्रीका के 10 से अधिक देशों के राजनयिकों , उद्यमियों और अधिकारियों की यहां शुक्रवार को एक गोलमेज चर्चा में एशिया अफ्रीका एग्री एलायंस (4ए) नाम से एक नयी औपचारिक शुरुआत की गई।
आयोजकों की आरे से जारी एक विज्ञप्ति के अनुसार यह नया संस्थागत मंच एशिया और अफ्रीका के बीच कृषि सहयोग, व्यापार, निवेश और प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान को बढ़ावा देने के उद्देश्य से स्थापित किया गया है। यह सम्मेलन मक्का और मिलेट्स और कृषि एवं जैव कचरे पर आयोजित कॉन्क्लेव-2026 के साथ आयोजित किया गया था। इसमें दस से अधिक देशों के राजदूत, वरिष्ठ राजनयिक, नीति-निर्माता और एग्रीबिजनेस क्षेत्र के प्रतिनिधि शामिल हुए।
गोलमेज बैठक की अध्यक्षता करते हुए श्री रेणुका शुगर्स लिमिटेड के एक्जीक्यूटिव चेयरमैन अतुल चतुर्वेदी ने कहा कि एशिया और अफ्रीका की क्षमताएँ एक-दूसरे की पूरक हैं और यदि इन्हें प्रभावी रूप से जोड़ा जाए तो वैश्विक कृषि क्षेत्र में बड़ा बदलाव संभव है। उन्होंने कहा कि अफ्रीका के पास विशाल कृषि क्षमता और उपजाऊ भूमि है, जबकि एशिया ने प्रसंस्करण, आपूर्ति श्रृंखला और कृषि प्रौद्योगिकी में उल्लेखनीय प्रगति की है। उनके अनुसार, एशिया अफ्रीका एग्री एलायंस जैसे मंच इन क्षमताओं को व्यावहारिक साझेदारियों में बदलने में मदद करेंगे।
कार्यक्रम में डॉ. अशोक दलवाई (अध्यक्ष, कर्नाटक कृषि मूल्य आयोग)ने भी कृषि क्षेत्र में दक्षिण-दक्षिण सहयोग के महत्व पर जोर दिया। इस गोलमेज बैठक में ब्रिटेन, जर्मनी, स्पेन, हंगरी और ऑस्ट्रिया सहित कई देशों के राजनयिकों के साथ-साथ चाड, नाइजर और बेनिन के दूतावासों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
विज्ञप्ति में कहा गया है कि एशिया और अफ्रीका वैश्विक कृषि उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं और दोनों क्षेत्रों के बीच कृषि व्यापार पहले से ही सालाना 90 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक है। इसी पृष्ठभूमि में एशिया अफ्रीका एग्री एलायंस को एक सेक्शन-8 ( गैर-लाभकारी संस्था) के रूप में स्थापित किया गया है, जो कृषि-खाद्य मूल्य श्रृंखला में व्यापार, निवेश, नीति सहयोग और तकनीकी साझेदारी को बढ़ावा देने के लिए एक संगठित मंच प्रदान करेगा।
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