नयी दिल्ली , जून 18 -- भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) की हैदराबाद स्थित संस्था भारतीय तिलहन अनुसंधान संस्थान (आईसीएआर-आईआईओआर) ने बीजों पर बायोपॉलिमर-आधारित आवरण चढ़ाने की स्मार्ट तकनीक विकसित की है, जिसे तमाम फसलों के बीजों की गुणवत्ता में सुधार और खेती में जैविक और अजैविक दबावों के विरुद्ध लचीलेपन को बढ़ाने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने गुरुवार को एक विज्ञप्ति में बताया कि यह तकनीक जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों को झेलने में सक्षम कृषि और उपज सुधारने के प्रयासों की दृष्टि से महत्वपूर्ण है। भारत में पेटेंटशुदा आईसीएआर-आईआईओआर की इस तकनीक के अंतर्गत बीजों के ऊपर जैविक रूप से मिटी बन जाने वाले पॉलिमरिक पदार्थों की परत चढ़ायी जाती है। जैविक पॉलिमर परत एक बहुक्रियाशील सुरक्षात्मक परत का काम करती है और लाभकारी सूक्ष्मजीवों, पोषक तत्वों, सूक्ष्म पोषक तत्वों, फसल सुरक्षा एजेंटों और पौधों की वृद्धि को बढ़ावा देने वाले यौगिकों के लिए एक वाहक प्रणाली के रूप में कार्य करती है।
विशेष बायो पॉलिमरों का आवरण बीजों के तेजी से अंकुरण, पौधों की अच्छी वृद्धि, जड़ों के बेहतर विकास और पर्यावरणीय दबावों के प्रति फल की सहनशीलता बढ़ाने में सहायक होते हैं।
जलवायु परिवर्तन, अनियमित वर्षा, सूखा, तापमान में अत्यधिक उतार-चढ़ाव, मृदा क्षरण, नये कीटों और रोगों के उदय, और संसाधनों के उपयोग की घटती दक्षता जैसी चुनौतियों के कारण कृषि क्षेत्र में बढ़ती चुनौतियों को देखते हुए, बीजों की श्रेष्ठ गुणवत्ता सुनिश्चित करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। बीज कृषि प्रौद्योगिकी का प्राथमिक वाहक है और फसल उत्पादकता का आधार है। अनुकूलतम प्रबंधन स्थितियों में भी, बीजों का खराब अंकुरण उपज को काफी हद तक सीमित कर सकता है। इसलिए, फसल वृद्धि के प्रारंभिक चरणों में बीजों की गुणवत्ता को मजबूत करना कृषि उत्पादकता में सुधार के सबसे किफायती और व्यापक तरीकों में से एक है।
विज्ञप्ति के अनुसार तेलंगाना में मूंगफली और सोयाबीन पर किये गये प्रदर्शनों में पारंपरिक कृषि पद्धतियों की तुलना में उपज में लगभग 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो उत्पादकता और लाभप्रदता बढ़ाने के लिए इस तकनीक की क्षमता को उजागर करती है।
इसी तरह सोयाबीन, मक्का, मूंगफली, चना, कपास, सरसों और अरहर के बीजों पर जैविक पॉलिमर के आवरण से उत्पादकता में 12-37 प्रतिशत की वृद्धि हुई।
आईसीएआर-आईआईओआर इस तकनीक के व्यापक प्रसार और उपयोग के लिए सरकारी और निजी बीज एजेंसियों के साथ साझेदारी प्रोत्साहित कर रहा है। मंत्रालय का कहना है कि राज्य बीज विकास निगम, राष्ट्रीय बीज निगम, सहकारी बीज संघ, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ), बीज प्रसंस्करण इकाइयां, बीज केंद्र, अनुकूलित बीज उपचार केंद्र, बीज उद्यमी और निजी बीज कंपनियां, स्मार्ट बीज प्रौद्योगिकियों को बीज उत्पादन और वितरण नेटवर्क में एकीकृत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
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