उदयपुर , जुलाई 30 -- भारतीय किसान संघ के राष्ट्रीय महामंत्री मोहिनी मोहन मिश्र ने कहा है कि भारत की कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अमेरिकी हस्तक्षेप मंजूर नहीं किया जाएगा।
श्री मिश्र गुरुवार को उदयपुर में भारतीय किसान संघ की दो दिवसीय प्रांतीय बैठक के समापन सत्रको मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। इस प्रांतीय बैठक में 16 जिलों और चार संभागों से आये राज्य स्तरीय पदाधिकारी और कार्यकर्ता शामिल हुए।
उन्होंने कहा कि देश विरोधी ताकतें सक्रिय हैं और भारत पर दबाव बनाने के लिए अमेरिका षड्यंत्र रच रहा है। अमेरिका के साथ हो रहे व्यापार समझौतों को लेकर भारतीय किसानों में गहरी चिंता है। अमेरिका में मात्र पांच मुख्य फसलें उगायी जाती हैं, जो जीएम होती हैं। वहां जीएम फसलों का उपयोग मानव आहार के स्थान पर पशुओं के चारे और एथेनॉल निर्माण में किया जाता है। अब अमेरिका इन जीएम फसलों को भारतीय बाजारों में भेजने का प्रयास कर रहा है।
श्री मिश्र ने स्पष्ट किया कि भारत में पांच हजार से अधिक पारंपरिक फसलें उगायी जाती हैं। भारतीय किसान संघ यह साफ कर देना चाहता है कि भारत की कृषि, पशुपालन और डेयरी क्षेत्र में किसी भी प्रकार का अमेरिकी हस्तक्षेप मंजूर नहीं किया जाएगा।
इस अवसर पर पत्रकारों से संवाद करते हुए श्री मिश्र ने कहा कि किसानों को उनकी लागत के आधार पर लाभकारी मूल्य मिलना अनिवार्य है। सरकार रासायनिक खाद के नाम पर ज़हर पर तो भारी अनुदान दे रही है, लेकिन पर्यावरण एवं स्वास्थ्यपूरक जैविक खेती पर एक रुपए का भी अनुदान नहीं दिया जाता। इस व्यवस्था में तुरंत सुधार होना चाहिए। कृषि मंडियों के स्थान पर पारदर्शी वैकल्पिक व्यवस्था बनाई जानी चाहिए और व्यापारिक एकाधिकार समाप्त होना चाहिए।
उन्होंने कहा कि केवल गौशालाएं खोलना गो रक्षा का स्थाई समाधान नहीं है। गाय का उपयोग केवल दूध उत्पादन तक सीमित न रहकर गौ-आधारित प्राकृतिक खेती से जोड़ा जाना चाहिए।
श्री मिश्र ने बताया कि भारतीय किसान संघ ने अब तक चार लाख कार्यकर्ताओं का प्रशिक्षण पूरा कराया है। किसान संघ के निरंतर संघर्ष और आंदोलनों के कारण ही अब किसानों को 'किसान सम्मान निधि' जैसी सुविधाएं मिल सकी हैं।
संगठन के विस्तार पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में राजस्थान में 16 हजार गांवों में नयी समितियां बनायी जाएंगी। इसके साथ ही फसल बीमा योजना में सुधार और किसानों के न्याय के लिए बड़े आंदोलन की तैयारी की जा रही है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय किसान संघ किसी भी प्रकार की हिंसा या राजनीतिक स्वार्थ से प्रेरित आंदोलनों के पक्ष में नहीं है। अनुशासन और पूर्व-तैयारी से ही आंदोलन सफल होते हैं।
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