चंडीगढ़ , मई 02 -- पंजाब सरकार ने जेल व्यवस्था में व्यापक सुधारों के लिए पंजाब कारागार एवं सुधार सेवाएं विधेयक 2026 तैयार किया है। यह विधेयक राज्य की मौजूदा जेल प्रशासन प्रणाली को आधुनिक, तकनीकी और मानवीय दिशा देगा। इसके लागू होने पर यह पुराने कारागार अधिनियम 1894 का स्थान लेगा। मुख्य रूप से हिरासत और अनुशासन तक सीमित था तथा वर्तमान चुनौतियों का पर्याप्त समाधान नहीं करता था।

पंजाब के जेल, प्रवासी भारतीय मामलों और संसदीय कार्य मंत्री रवजोत सिंह ने शनिवार को संवाददाता सम्मेलन में कहा कि नया विधेयक जेलों को केवल बंदीगृह से आगे बढ़ाकर सुधार, पुनर्वास और सामाजिक पुनर्स्थापन के केंद्रों में बदलने पर केंद्रित है। इसमें बंदियों के मानवाधिकारों की रक्षा, पारदर्शिता, जवाबदेही और सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के अनेक प्रावधान किये गये हैं।

श्री सिंह ने तकनीक के उपयोग पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विधेयक के तहत जेलों में ई-कारागार प्रणाली, डिजिटल अभिलेख प्रबंधन, जैविक पहचान प्रणाली, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग, कृत्रिम बुद्धिमत्ता आधारित सीसीटीवी निगरानी, रेडियो आवृत्ति पहचान ट्रैकिंग और ड्रोन रोधी प्रणाली लागू की जाएगी। इससे जेल प्रशासन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी।

उन्होंने सुरक्षा सुधारों के बारे में कहा कि उच्च जोखिम वाले कैदियों के लिए उच्च सुरक्षा क्षेत्र बनाये जाएंगे, ताकि वे अन्य बंदियों पर नकारात्मक प्रभाव न डाल सकें। इसके साथ ही आंतरिक सुरक्षा मजबूत करने के लिए अनुसंधान, विश्लेषण और खुफिया शाखा स्थापित की जाएगी। उन्होंने बताया कि विधेयक में बंदियों का आयु, लिंग, आपराधिक पृष्ठभूमि, स्वास्थ्य और व्यवहार के आधार पर वैज्ञानिक वर्गीकरण किया जाएगा। महिलाओं, तृतीय लिंग व्यक्तियों, बुजुर्गों और बीमार कैदियों के लिए अलग आवास, महिला कर्मचारियों की नियुक्ति तथा गर्भवती महिलाओं और बच्चों के लिए विशेष सुविधाएं उपलब्ध करायी जाएंगी।

स्वास्थ्य और कौशल विकास पर जोर देते हुए डॉ सिंह ने कहा कि हर जेल में चिकित्सा सुविधाएं, नियमित स्वास्थ्य जांच, क्षय रोग, एचआईवी और नशा संबंधित बीमारियों की जांच की व्यवस्था होगी। साथ ही नशामुक्ति केंद्र और मानसिक स्वास्थ्य सेवाएं भी उपलब्ध होंगी। उन्होंने कहा कि शिक्षा और कौशल विकास को उच्च प्राथमिकता दी गयी है। बंदियों को शिक्षा, पुस्तकालय सुविधाएं और व्यावसायिक प्रशिक्षण उपलब्ध कराया जाएगा ताकि वे समाज में दोबारा सम्मानपूर्वक स्थापित हो सकें। जेल उद्योगों के माध्यम से रोजगार अवसर और कौशल आधारित मजदूरी भी दी जाएगी। उन्होंने कहा कि जेलों के भीतर अपराधों के लिए कड़े दंड का प्रावधान किया गया है। फरार होने की कोशिश, अधिकारियों को धमकाना या प्रतिबंधित वस्तुओं की तस्करी को गंभीर अपराध माना जाएगा और सख्ती से निपटा जाएगा। उन्होंने बताया कि पात्र बंदियों को धीरे-धीरे समाज में पुनर्स्थापित करने के लिए खुली और अर्ध-खुली जेलें स्थापित करने का प्रस्ताव है। रिहाई के बाद पुनर्वास और पश्चात देखभाल सेवाएं भी उपलब्ध करायी जाएंगी। डॉ. सिंह ने कहा कि पंजाब कारागार एवं सुधार सेवाएं विधेयक 2026 सुरक्षा, तकनीक और मानवाधिकारों के बीच संतुलन स्थापित करने वाला व्यापक सुधार है, जो जेलों को आधुनिक सुधारात्मक संस्थानों में बदलने की दिशा में मजबूत कदम साबित होगा।

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