श्योपुर , फरवरी 28 -- मध्यप्रदेश के श्योपुर जिले स्थित कूनो नेशनल पार्क में आज सुबह इतिहास के एक और पन्ने पर चीते के पंजों के निशान दर्ज हो गए।

बोत्सवाना से 12 घंटे की हवाई यात्रा के बाद 9 नए चीते भारत पहुंचे और हेलिकॉप्टर से कूनो लाकर सीधे क्वारंटीन बाड़ों में शिफ्ट कर दिए गए। इसके साथ ही देश में चीतों की कुल संख्या 39 से बढ़कर 48 हो गई।

नई खेप में 6 मादा और 3 नर चीते हैं। यही खेप सबसे बड़ी ताकत है क्योंकि अब तक कूनो में नर चीतों का पलड़ा भारी था, लेकिन इस खेप ने संतुलन की तस्वीर बदल दी है। विशेषज्ञ मान रहे हैं कि इससे आने वाले महीनों में प्रजनन की रफ्तार तेज हो सकती है।

चीतों के स्वागत के मौके पर केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव खुद कूनो पहुंचे। श्री यादव ने क्रेट का हैंडल घुमाकर तीन चीतों को क्वारंटीन बाड़े में रिलीज किया। बाकी चीतों को वन विभाग की प्रशिक्षित टीम ने तय प्रोटोकॉल के तहत शिफ्ट किया।

जानकारी के अनुसारजानकारी के अनुसार कूनो पार्क में 12 महीने से अधिक उम्र के चीतों का गणित अब साफ तौर पर बदल गया है। पहले यहां 26 वयस्क चीते थे 14 नर और 12 मादा। अब 9 नए चीतों के जुड़ने से वयस्कों की संख्या 35 हो गई है।

जानकारी में बताया गया है कि अब मादाओं का पलड़ा थोड़ा आगे है। वन्यजीव विशेषज्ञ इसे बेहद अहम मान रहे हैं। उनका कहना है कि मादाओं की संख्या बढ़ने से क्षेत्रीय टकराव कम होगा और शावकों के जन्म की संभावना बढ़ेगीआए हुए सभी 9 चीतों को एक महीने तक क्वारंटीन बाड़ों में रखा जाएगा। इस दौरान उनकी सेहत, व्यवहार और अनुकूलन क्षमता पर लगातार नजर रहेगी। इसके बाद चीता स्टीयरिंग समिति तय करेगी कि किन चीतों को खुले जंगल में छोड़ा जाए और किन्हें निगरानी में रखा जाए।

वन विभाग के अधिकारियों के मुताबिक, हर चीते को जंगल में उतारने से पहले उसके मूवमेंट, शिकार प्रवृत्ति और इंसानी दखल से दूरी जैसे पहलुओं की बारीकी से जांच की जाती है।

अब कूनो एक पार्क नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय जेनेटिक प्रयोगशाला बन चुका है। यहां नामीबिया, दक्षिण अफ्रीका और अब बोत्सवाना तीन अलग-अलग भौगोलिक क्षेत्रों के चीते मौजूद हैं।

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