कुशीनगर , जुलाई 30 -- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले में बरसात के मौसम के दौरान सर्पदंश की घटनाओं में तेजी से वृद्धि हुई है। पिछले 30 दिनों में कुशीनगर मेडिकल कॉलेज में सर्पदंश के 492 मरीज भर्ती किए गए, जिनमें उपचार में देरी और झाड़-फूंक के चक्कर में पड़ने के कारण नौ लोगों की मौत हो गई।

मेडिकल कॉलेज प्रशासन के अनुसार, अधिकांश मामलों में परिजन पहले झाड़-फूंक और घरेलू उपचार का सहारा लेते हैं, जिससे मरीज को समय पर चिकित्सकीय उपचार नहीं मिल पाता और उसकी हालत गंभीर हो जाती है।

वर्तमान में ठाढ़ीभार की सरिता देवी, खिरकिया के राजा हुसैन (25), जंगल नाहर छपरा के नरेश गोंड (55), कोटवा की सीमा देवी तथा रामपुर राजा के राम नारायण (55) का मेडिकल कॉलेज में उपचार चल रहा है। वहीं बिहार के पश्चिमी चंपारण (बगहा) निवासी 22 वर्षीय सत्येंद्र सिंह की हालत गंभीर होने पर उन्हें गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया है।

कुशीनगर मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. के.पी. गौड़ ने गुरुवार को बताया कि अस्पताल में एंटी स्नेक वेनम (एएसवी) इंजेक्शन सहित सभी आवश्यक दवाएं उपलब्ध हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में 1,300 एएसवी इंजेक्शन उपलब्ध हैं तथा 5,000 अतिरिक्त इंजेक्शन की मांग की गई है। उन्होंने लोगों से अपील की कि सर्पदंश की स्थिति में मरीज को बिना विलंब सीधे अस्पताल पहुंचाएं।

इमरजेंसी प्रभारी डॉ. पुष्कर पाठक ने बताया कि 21 जून से 20 जुलाई के बीच 492 सर्पदंश पीड़ितों का उपचार किया गया, जिनके इलाज में लगभग 2,300 एएसवी इंजेक्शन का उपयोग हुआ। उन्होंने कहा कि प्रतिदिन औसतन आठ से अधिक सर्पदंश पीड़ित मेडिकल कॉलेज पहुंच रहे हैं।

वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. उपेंद्र चौधरी ने बताया कि सर्पदंश के बाद शुरुआती एक से दो घंटे उपचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उनके अनुसार प्रतिदिन आने वाले लगभग 90 प्रतिशत मामलों में सांप विषैले नहीं होते और समय पर एएसवी इंजेक्शन मिलने से मरीजों की जान बचाई जा सकती है।

चिकित्सकों ने सलाह दी है कि सर्पदंश होने पर घबराएं नहीं और न ही झाड़-फूंक या तंत्र-मंत्र के भरोसे रहें। प्रभावित अंग को न काटें और न ही अत्यधिक कसकर बांधें। काटे गए स्थान से थोड़ा ऊपर हल्का कपड़ा बांधकर मरीज को शांत अवस्था में रखते हुए तुरंत निकटतम सरकारी अस्पताल या मेडिकल कॉलेज पहुंचाएं। उन्होंने बताया कि धुंधला दिखाई देना, उल्टी, पेट दर्द, काटे गए स्थान पर तेज दर्द या काला धब्बा पड़ना, आवाज में बदलाव तथा मुंह से लार निकलना विषैले सर्पदंश के प्रमुख लक्षण हो सकते हैं।

हिंदी हिन्दुस्तान की स्वीकृति से एचटीडीएस कॉन्टेंट सर्विसेज़ द्वारा प्रकाशित