कुशीनगर , अक्टूबर 21 -- कुशीनगर के कृषि विज्ञान केंद्र की ओर से मशरूम उत्पादन एवं मूल्य संवर्धन विषय पर आयोजित पांच दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन हुआ। अंतिम दिन प्रशिक्षण प्राप्त युवा किसानों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए। विज्ञानियों ने किसानों को मशरूम की खेती स्वरोजगार के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित किया।
भारतीय सब्जी अनुसंधान संस्थान, वाराणसी के निदेशक डा. राजेश कुमार के निर्देश पर आयोजित प्रशिक्षण में केंद्र प्रमुख डा. नवीन कुमार सिंह ने कहा कि कम लागत और कम जगह में मशरूम की खेती शुरू कर किसान अच्छी आय अर्जित कर सकते हैं।
बाजार की मांग के अनुसार उत्पादन करने से इस क्षेत्र में बेहतर संभावनाएं हैं। कृषि विज्ञान केंद्र किसानों को तकनीकी सहायता भी उपलब्ध कराएगा। प्रशिक्षण समन्वयक रिद्धि वर्मा ने ढिंगरी, बटन और दूधिया मशरूम की खेती की विधि बताई।
उन्होंने अलग-अलग मौसम के लिए उपयुक्त किस्मों की जानकारी दी और बताया कि धान व गेहूं के भूसे से भी मशरूम उत्पादन शुरू किया जा सकता है। केंद्र चयनित किसानों को मशरूम के बीज उपलब्ध कराने की व्यवस्था भी करता है। इस दौरान डा. अरुण प्रताप सिंह, जेपी गुप्ता, विशाल सिंह, कृपाशंकर चौधरी और सतीश सिंह सहित अन्य मौजूद रहे।
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