कुशीनगर , अगस्त 27 -- नेपाल से आई सूचना के बाद नारायणी नदी के संभावित बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कुशीनगर जिला प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में सतर्कता बढ़ा दी है। प्रशासन की विशेष नजर नदी के उस पार बसे रेता क्षेत्र के गांवों पर है, जहां बड़ी संख्या में लोग और उनके मवेशी नदी के आसपास तथा निचले इलाकों में रहते हैं। जलस्तर में अचानक वृद्धि की स्थिति में लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी शुरू कर दी गई है।
जिलाधिकारी महेंद्र सिंह तंवर ने पुलिस अधीक्षक केशव कुमार के साथ नारायणी नदी के तटवर्ती एवं संवेदनशील गांवों तथा वाल्मीकिनगर बैराज का स्थलीय निरीक्षण कर स्थिति का जायजा लिया। डीएम ने ग्रामीणों से संवाद कर उन्हें सतर्क रहने तथा नदी और निचले इलाकों से दूरी बनाए रखने की अपील की।
प्रशासन के अनुसार नरवा जोत एपी बांध के किलोमीटर 3.00 से 4.00 के बीच, किलोमीटर 10.518 स्थित स्पर तथा किलोमीटर 13.000 से 14.500 के बीच नदी का दबाव बना हुआ है। संवेदनशील स्थानों पर बाढ़ खंड की ओर से जियो बैग और परक्यूपाइन लगाकर सुरक्षा उपाय किए गए हैं। विभागीय कर्मचारी और अभियंता लगातार तटबंधों की निगरानी कर रहे हैं।
बुधवार दोपहर अधिकारियों की टीम नदी पार शिवपुर गांव और तटबंधों पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों को संभावित जलस्तर बढ़ने की जानकारी देते हुए ऊंचे स्थानों पर जाने के लिए तैयार रहने को कहा। इसके बाद नारायनपुर, शिवपुर, सालिकपुर और मरचहवा समेत कई गांवों में लोगों की चिंता बढ़ गई। नदी पार के ग्रामीण जरूरी सामान समेटकर सुरक्षित स्थानों की ओर जाने लगे, जबकि खेतों में काम कर रहे किसानों और मजदूरों को भी वापस बुला लिया गया।
नदी का जलस्तर बढ़ने की आशंका से खड्डा और तमकुहीराज क्षेत्र के करीब 70 हजार लोगों की चिंता बढ़ गई है। बाढ़ प्रभावित मरचहवा गांव के दक्षिण टोला के ग्रामीणों का कहना है कि सामान्य बाढ़ में ही रास्ते पानी में डूब जाते हैं और चारों ओर पानी भरने पर सड़क संपर्क पूरी तरह कट जाता है। ऐसे में भारी बाढ़ की स्थिति में बच्चों, महिलाओं और पशुओं को सुरक्षित स्थान तक पहुंचाना मुश्किल हो सकता है।
जिला प्रशासन के प्रवक्ता के अनुसार वाल्मीकि गंडक बैराज के सभी 36 गेट खोल दिए गए हैं। बैराज से पानी का डिस्चार्ज लगातार बढ़ा। बुधवार रात आठ बजे डिस्चार्ज करीब 1.04 लाख क्यूसेक था, जो रात साढ़े नौ बजे बढ़कर 1,36,700 क्यूसेक और रात दस बजे 1,42,100 क्यूसेक तक पहुंच गया। अपर स्ट्रीम में नदी का जलस्तर 354.90 फीट और डाउन स्ट्रीम में 352.30 फीट दर्ज किया गया।
संभावित आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ की टीम को भी तैनात कर दिया गया है। टीम को आवश्यक राहत एवं बचाव उपकरणों के साथ अलर्ट मोड पर रखा गया है। प्रशासन की ओर से नदी के जलस्तर और डिस्चार्ज की लगातार निगरानी की जा रही है। आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित क्षेत्रों से लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी की गई है।
तमकुहीराज के एसडीएम कुणाल गौरव ने सभी थाना प्रभारियों, बीडीओ और मुख्य सेविकाओं को अपने-अपने क्षेत्रों में लाउडस्पीकर के माध्यम से ग्रामीणों को जागरूक करने के निर्देश दिए हैं। एसडीएम और नायब तहसीलदार शिव शंकर मिश्र ने राजस्व टीम तथा बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ बाढ़ संभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर ग्रामीणों से सावधानी बरतने की अपील की।
बाढ़ खंड के एसडीओ दीप रतन सिंह अभियंताओं और कर्मचारियों के साथ तटबंध पर डटे हैं। जेई रमेश धर दुबे समेत विभागीय टीम संवेदनशील बिंदुओं पर नदी के रुख पर नजर रख रही है। प्रशासन ने संवेदनशील क्षेत्रों में पेयजल, मोबाइल टॉयलेट और अन्य आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था की तैयारी भी शुरू कर दी है।
पुलिस अधीक्षक केशव कुमार ने बताया कि बड़ी गंडक नदी में संभावित बाढ़ को देखते हुए खड्डा, हनुमानगंज, तरयासुजान और सेवरही थानों की पुलिस को अलर्ट किया गया है। बाढ़ की आशंका वाले सात गांवों के लोगों को सतर्क किया गया है। दो प्लाटून पीएसी तैनात की गई हैं और दो अन्य प्लाटून की मांग की गई है।
प्रशासन ने ग्रामीणों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने, नदी के किनारे अनावश्यक रूप से नहीं जाने और प्रशासन की ओर से जारी सूचनाओं का पालन करने की अपील की है। अधिकारियों ने कहा कि स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है और किसी भी आपात स्थिति में राहत एवं बचाव कार्य में देरी नहीं होने दी जाएगी।
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