कुशीनगर , सितंबर 14 -- उत्तर प्रदेश के कुशीनगर जिले के खड्डा में प्रतिदिन एक लाख लीटर एथेनॉल उत्पादन की प्रस्तावित परियोजना की कागजी और तकनीकी तैयारियां पूरी होने के बावजूद पर्याप्त गन्ना नहीं मिलने से अटकी हुई है। परियोजना के लिए धन की व्यवस्था भी की जा चुकी है, लेकिन कच्चे माल की उपलब्धता सुनिश्चित नहीं होने से काम आगे नहीं बढ़ पा रहा है।
आईपीएल चीनी मिल की पेराई क्षमता 45 लाख क्विंटल है, जबकि पिछले पेराई सत्र में मिल को करीब 27 लाख क्विंटल गन्ना ही मिल सका था। जानकारों के अनुसार गन्ने की पर्याप्त उपलब्धता नहीं होना प्रस्तावित एथेनॉल संयंत्र की राह में सबसे बड़ी बाधा है।
एथेनॉल संयंत्र के लिए मुख्य कच्चा माल गन्ने की पेराई से निकलने वाला शीरा है। ऐसे में पर्याप्त गन्ने के अभाव में संयंत्र का नियमित संचालन मुश्किल है। 100 किलोलीटर यानी एक लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले संयंत्र के लिए जमीन का चयन, भूमि परीक्षण सहित आवश्यक तकनीकी और कागजी प्रक्रिया पूरी हो चुकी है। आईपीएल ने परियोजना पर करीब डेढ़ अरब रुपये से अधिक खर्च करने की योजना बनाई है।
पेट्रोल में एथेनॉल की मात्रा बढ़ाने और वैकल्पिक ईंधन के रूप में इसके इस्तेमाल को बढ़ावा देने की दिशा में केंद्र और प्रदेश सरकारों की ओर से प्रयास किये जा रहे हैं। ऐसे में खड्डा में प्रस्तावित संयंत्र का अटकना क्षेत्र के औद्योगिक विस्तार के लिए झटका माना जा रहा है। संयंत्र शुरू होने से शीरे का स्थानीय स्तर पर उपयोग होने के साथ रोजगार, परिवहन और अन्य कारोबारी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
खड्डा में एथेनॉल प्लांट लगाने की कवायद फरवरी 2020 में शुरू हुई थी। तत्कालीन एडीएम विंध्यवासिनी राय की अध्यक्षता में आईपीएल के उच्चाधिकारी विशाल सोनक, प्रदूषण बोर्ड के वैज्ञानिक राममिलन वर्मा, पर्यावरण सलाहकार मनोज गर्ग और किसानों के साथ हुई बैठक में संयंत्र लगाने का निर्णय लिया गया था। उस समय 60 किलोलीटर एथेनॉल और ढाई मेगावाट बिजली उत्पादन की योजना थी। वर्ष 2023 में खड्डा में आयोजित जनसभा में मुख्यमंत्री ने भी इसकी चर्चा की थी। बाद में अन्न से भी एथेनॉल बनाने की योजना बनी, लेकिन उसे रोक दिया गया।
आईपीएल चीनी मिल खड्डा के प्रधान प्रबंधक एनपी सिंह ने बताया कि एक लाख लीटर प्रतिदिन क्षमता वाले एथेनॉल संयंत्र के लिए सभी कागजी और तकनीकी औपचारिकताएं पूरी कर ली गयी हैं। मिल परिसर में ही जमीन आरक्षित की गयी है, लेकिन पर्याप्त गन्ना नहीं मिल पा रहा है। इसी वजह से परियोजना पर आगे काम नहीं बढ़ पा रहा है।
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