कुशीनगर , अक्टूबर 18 -- उत्तर प्रदेश में कुशीनगर जिले के गंडक नदी के किनारे बने एपी बांध में जवही दयाल और अहिरौलीदान के बीच हुए नुकसान के बाद तटबंधों की सुरक्षा मजबूत करने की प्रशासन ने मन बना लिया है। अब नदी के धारा को बांध से दूर करने के लिए बीच में पड़ी सिल्ट की सफाई होगी।

शनिवार को लखनऊ से आई मैकेनिकल टीम ने बाढ़ खंड के अभियंताओं के साथ अमवा बांध से अहिरौलीदान तक नदी का निरीक्षण किया। निरीक्षण में विस्तृत रिपोर्ट शासन को भेजने की बात सामने आयी। जिसमेंगंडक नदी की धारा को तटबंधों से दूर करने के लिए बीच धारा में जमा सिल्ट हटाने (ड्रेजिंग) की योजना तैयार की गई है। मंजूरी मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी। शनिवार की शाम अधीक्षण अभियंता विजय कुमार और अधिशासी अभियंता कुमार गौरव के नेतृत्व में पहुंची टीम ने अमवा, नरवाजोत और एपी बांध के आसपास नदी की धारा तथा तटबंधों पर पड़ रहे दबाव का आकलन किया।

इस संबंध में रविवार को प्रेस वार्ता में बाढ़ खंड के एसडीओ दीपरतन सिंह के बताया कि गंडक नदी के बीच बड़ी मात्रा में सिल्ट जमा होने से प्रवाह प्रभावित हुआ है। कई स्थानों पर धारा तटबंधों की ओर मुड़ने से कटान का खतरा बढ़ गया है। अभियंताओं का मानना है कि नदी के मध्य में जमा सिल्ट हटाकर प्रवाह को मुख्य धारा में बनाए रखने से तटबंधों पर दबाव कम किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि इसके लिए तकनीकी अध्ययन के आधार पर विस्तृत कार्ययोजना तैयार की जा रही है। ताकि जवही दयाल में एपी बांध को क्षति पहुंचने और अहिरौलीदान में कटान से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित नहीं हो।

इस निरीक्षण में बाढ़ खंड के जेई रमेशधर दुबे, सुनील यादव, अमर श्रीवास्तव, अजीत सिंह, रामचंद्र प्रसाद और अभिजित सिंह सहित अन्य अभियंता भी साथ रहे।

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