बेंगलुरु , जून 22 -- मेकेदातु मुद्दे पर फिर से शुरू हुई बहस के बीच, केंद्रीय मंत्री और जेडीएस नेता एचडी कुमारस्वामी ने सोमवार को नयी दिल्ली में कर्नाटक के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाए।

उन्होंने पूछा कि कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने संसद में राज्य के जल हितों की रक्षा के लिए क्या किया है। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से दखल देने की अपील की और राज्यों के बीच लंबे समय से लंबित नदी जल विवादों को सुलझाने का आग्रह किया।

यहां पत्रकारों से बात करते हुए श्री कुमारस्वामी ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एच.डी. देवेगौड़ा ने मेकेदातु जलाशय परियोजना के लिए लगातार कई प्रधानमंत्रियों को ज्ञापन सौंपकर प्रयास किए लेकिन तमिलनाडु के विरोध के कारण यह परियोजना अटका रहा।

श्री कुमारस्वामी ने पूछा, "क्या राज्यसभा में विपक्ष के नेता और फ्लोर लीडर के तौर पर श्री खरगे ने कभी कावेरी, अपर कृष्णा, अपर भद्रा या सिंचाई की दूसरी परियोजनाओं को लेकर कर्नाटक की चिंताओं को ज़ोर-शोर से उठाया है? कर्नाटक के हक़ के लिए लड़ने के लिए वे संसद में कितनी बार खड़े हुए हैं?"केंद्रीय मंत्री ने कहा कि मेकेदातु को लेकर होने वाली चर्चा में सिर्फ़ तमिलनाडु की आपत्तियों पर ही ध्यान नहीं दिया जाना चाहिए बल्कि इस बात पर भी गौर करना चाहिए कि क्या कर्नाटक के चुने हुए प्रतिनिधियों ने राष्ट्रीय स्तर पर राज्य का पक्ष प्रभावी ढंग से रखा है।

साथ ही, श्री कुमारस्वामी ने प्रधानमंत्री मोदी से गतिरोध को सुलझाने में अधिक सक्रिय भूमिका निभाने की अपील की। उन्होंने तर्क दिया कि केवल केंद्र सरकार ही दक्षिणी राज्यों के बीच लंबे समय से चले आ रहे जल विवादों का स्थायी समाधान निकाल सकती है।

श्री कुमारस्वामी ने बताया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल स्तर पर कई बार पानी से जुड़ी चुनौतियों पर चर्चा हुई है और दावा किया कि प्रधानमंत्री ने खुद पानी की बढ़ती कमी और भविष्य में इसकी उपलब्धता को लेकर अनिश्चितता पर चिंता जताई है।

उनके अनुसार, मेकेदातु के लिए कर्नाटक का पक्ष मुख्य रूप से मौजूदा पानी-बंटवारे की व्यवस्था को बदलने के बजाय बेंगलुरु और आसपास के इलाकों में पीने का पानी सुनिश्चित करने की ज़रूरत पर आधारित है।

प्रधानमंत्री के रूप में श्री देवेगौड़ा के कार्यकाल को याद करते हुए, श्री कुमारस्वामी ने नर्मदा जल-बंटवारे के मुद्दे का उदाहरण दिया कि कैसे केंद्र में राजनीतिक नेतृत्व राज्यों के बीच के जटिल विवादों को सुलझा सकता है।

उन्होंने कहा, "जब देवेगौड़ा प्रधानमंत्री थे तब नर्मदा को लेकर लिए गए फैसलों से कई राज्यों को फायदा हुआ था। कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के बीच के विवादों को सुलझाने के लिए आज भी वैसी ही राजनीतिक इच्छाशक्ति की ज़रूरत है।"श्री कुमारस्वामी ने पानी के बंटवारे को लेकर हुई बातचीत में कर्नाटक के हितों की ठीक से रक्षा न कर पाने के लिए लगातार बनी सरकारों और राजनीतिक नेताओं की आलोचना भी की।

उन्होंने कहा, "श्री देवेगौड़ा ने हाथ जोड़कर बार-बार कर्नाटक के अधिकारों के लिए अपील की। देश ने उन कोशिशों को देखा है। फिर भी राज्य से जुड़े कई मुद्दों पर न्याय नहीं मिल पाया है।"उनके बयानों से सत्ताधारी कांग्रेस और जेडीएस-भाजपा गठबंधन के बीच राजनीतिक मुकाबला और तेज़ होने की उम्मीद है। श्री कुमारस्वामी मेकेदातु मुद्दे को न सिर्फ़ तमिलनाडु के साथ विवाद के रूप में देख रहे हैं बल्कि इसे संसद में कर्नाटक के राजनीतिक प्रभाव और केंद्र की समाधान निकालने की इच्छाशक्ति की परीक्षा के तौर पर भी पेश कर रहे हैं।

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