बेंगलुरु , जुलाई 10 -- केंद्रीय इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने शुक्रवार को अपने राजनीतिक भविष्य को लेकर चल रहीसभी अटकलों पर विराम लगाते हुए स्पष्ट किया कि फिलहाल कर्नाटक की राजनीति में लौटने का उनका कोई इरादा नहीं है।

उन्होंने हालांकि संकेत दिया कि वह राज्य में जनता दल (सेक्युलर) को फिर मजबूत करने के लिए अधिक सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

श्री कुमारस्वामी ने उनका पूरा ध्यान कर्नाटक पर केंद्रित करने की खबरों का जवाब देते हुए कहा कि राज्य के उनके बार-बार के दौरों का यह मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए कि वह तुरंत वापस लौट रहे हैं। उन्होंने यहां संवाददाताओं से कहा, " राज्य में आने का मतलब यह नहीं है कि मैं कल ही वापस आ रहा हूं। मैं राज्य और केंद्र दोनों जगह काम कर रहा हूं। "कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार में उनकी जिम्मेदारियां उनकी प्राथमिकता बनी हुई हैं। उन्होंने रेखांकित किया कि लोकसभा सदस्य के रूप में उनका अभी तीन साल का कार्यकाल बचा हुआ है और केंद्र द्वारा उन्हें महत्वपूर्ण कार्य सौंपे गये हैं।उन्होंने कहा, " मैं वर्तमान में एक केंद्रीय मंत्री हूं और लोकसभा सदस्य के रूप में मेरे कार्यकाल के तीन वर्ष और शेष हैं। मुझे केंद्र में कुछ जिम्मेदारियां दी गयी हैं और मैं उन्हें संभाल रहा हूं। इसके साथ ही, मैं राज्य में पार्टी को मजबूत करने के लिए सक्रिय रूप से काम करूंगा। "श्री कुमारस्वामी के इस बयान को उनकी राष्ट्रीय जिम्मेदारियों और कर्नाटक में उनके निरंतर प्रभाव के बीच संतुलन बनाने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है, जहां भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के साथ गठबंधन के बाद जद(स) अपनी राजनीतिक जमीन को फिर से हासिल करने की कोशिश कर रही है। जद (स) नेता के इस दावे ने उन अटकलों पर भी रोक लगा दी है कि वह राज्य में पार्टी के अभियान का नेतृत्व करने के लिए जल्द ही नयी दिल्ली में अपना पद छोड़ सकते हैं।

राज्य की राजनीति में तत्काल बदलाव को खारिज करने के साथ ही श्री कुमारस्वामी ने स्पष्ट कर दिया कि जद (स) का संगठनात्मक पुनर्गठन उनकी प्राथमिकताओं में से एक रहेगा। उनकी यह टिप्पणी इसलिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है, क्योंकि पार्टी आने वाले चुनावी मुकाबलों से पहले भाजपा-जद (स) गठबंधन के भीतर अपने कार्यकर्ताओं को एकजुट करने और अपनी भूमिका को नये सिरे से परिभाषित करने के लिए काम कर रही है।

आगामी हिरियूर विधानसभा उपचुनाव के विषय पर श्री कुमारस्वामी ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की ओर से जद (स) उम्मीदवार उतारने का काफी दबाव है, लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गठबंधन सहयोगी भाजपा के साथ अभी बातचीत चल रही है। उन्होंने कहा, " हिरियूर से चुनाव लड़ने के लिए हमारे कार्यकर्ताओं का दबाव है। मैंने इस मामले पर भाजपा के शीर्ष नेतृत्व और हिरियूर निर्वाचन क्षेत्र के नेताओं से चर्चा की है। हमारे पास अभी समय है, देखते हैं क्या होता है।" इससे यह संकेत मिलता है कि सीट बंटवारे पर अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

हिरियूर उपचुनाव को भाजपा और जद (स) के बीच समन्वय की पहली परीक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जहां दोनों दल गठबंधन के समीकरणों को ध्यान में रखते हुए चुनावी रणनीति का आकलन कर रहे हैं।

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