बेंगलुरु , जून 22 -- कर्नाटक की ज़मीन से जुड़ी राजनीति एक बार फिर गरमा गई है जिसमें केंद्रीय मंत्री एचडी कुमारस्वामी ने विधानसभा की पुरानी बहसों का ज़िक्र करते हुए राज्य सरकार पर बिदादी स्मार्ट टाउनशिप परियोजना के मामले में एक समानांतर व्यवस्था चलाने का आरोप लगाया है।

श्री कुमारस्वामी ने टाउनशिप से जुड़े फ़ैसले लेने की प्रक्रिया को अनौपचारिक बताया और आरोप लगाया कि ज़मीन की अधिसूचना से जुड़े अहम प्रशासनिक कदम उपायुक्त के दफ्तर के ज़रिए नहीं, बल्कि सरकार के तय ढांचे से बाहर के अनौपचारिक तरीकों से उठाए जा रहे हैं। उन्होंने ज़मीन अधिग्रहण और विकास से जुड़ी अधिसूचना जारी करने और उन्हें लागू करने के तरीके में पूरी पारदर्शिता की मांग की।

पूर्व मुख्यमंत्री ने 2007 की राजनीतिक घटनाओं की भी याद दिलाई और विधानसभा की कार्यवाही का ज़िक्र किया, जिसमें तत्कालीन विपक्षी नेताओं श्री सिद्दारमैया और श्री डीके शिवकुमार ने टाउनशिप और ज़मीन के इस्तेमाल में बदलाव के प्रस्तावों का ज़ोरदार विरोध किया था। श्री कुमारस्वामी ने बताया कि वही नेता अब इसी तरह के शहरी विकास परियोजना प्रोजेक्ट्स पर सरकारी फ़ैसले ले रहे हैं और उन्होंने समय के साथ उनके राजनीतिक रुख में आए बदलाव की ओर ध्यान दिलाया।

श्री कुमारस्वामी ने सरकार पर हमला तेज़ करते हुए आरोप लगाया कि वह नंदी इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर एंटरप्राइज़ (नाइस) गलियारा परियोजना यानी बेंगलुरु-मैसूर अवसंरचना गलियारा से जुड़े किसानों की लंबे समय से लंबित शिकायतों को दूर करने में नाकाम रही है। उन्होंने दावा किया कि हज़ारों ज़मीन मालिकों को अभी भी सही पुनर्वास और वैकल्पिक ज़मीन का इंतज़ार है। उन्होंने आरोप लगाया कि किसानों की आपत्तियों का सही जवाब नहीं दिया जा रहा है और इस प्रक्रिया में जवाबदेही की कमी है।

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