हल्द्वानी , अप्रैल 27 -- उत्तराखंड के कुमाऊं मंडल के 07 शहरों में जलभराव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। मास्टर ड्रेनेज प्लान को सोमवार को मंजूरी के लिए शासन को भेज दिया गया है।

मुख्यमंत्री के सचिव और कुमाऊं आयुक्त दीपक रावत की अध्यक्षता में हल्द्वानी में हुई बैठक में मास्टर ड्रेनेज प्लान पर अंतिम मुहर लगी। इससे पहले सिंचाई विभाग समेत अनेक विभागों के अभियंताओं की ओर इस पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।

बैठक में कुमाऊं के प्रमुख शहरों-पिथौरागढ़, टनकपुर, कपकोट, गरुड़, बागेश्वर, बनबसा सहित अन्य क्षेत्रों के लिए तैयार ड्रेनेज प्लान की रूपरेखा रखी गई।

मंडलायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए कि जलभराव की समस्या के स्थायी और वैज्ञानिक समाधान में किसी प्रकार की कमी न रहे। उन्होंने कहा कि नालों की चौड़ाई और गहराई का निर्धारण वैज्ञानिक आधार पर किया जाए और जल निकासी व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए सभी विभागों में बेहतर समन्वय सुनिश्चित किया जाए। साथ ही, कैचपिट निर्माण और नालों के ढाल पर विशेष ध्यान देने के निर्देश दिए, ताकि सिल्ट और कचरे से नालों के जाम होने की समस्या से बचा जा सके।

प्रस्तुतीकरण में बताया गया कि प्रस्तावित योजनाओं के तहत नालों की 100 प्रतिशत कनेक्टिविटी सुनिश्चित की जाएगी, जिससे जलभराव, अनियंत्रित अपवाह और भू-कटाव जैसी समस्याओं से राहत मिलेगी।

कपकोट में 10.14 किमी ड्रेनेज नेटवर्क के लिए 37.28 करोड़ रुपये, बागेश्वर में 35.32 किमी के लिए 129.50 करोड़ रुपये और गरुड़ में 8.28 किमी के लिए 25.54 करोड़ रुपये की योजना प्रस्तावित की गई है। इसी तरह पिथौरागढ़ शहर के लिए 16.77 किमी ड्रेनेज नेटवर्क पर 87.85 करोड़, टनकपुर में 31.32 किमी के लिए 101.57 करोड़ रुपये और बनबसा में 25.60 किमी के लिए 66.57 करोड़ रुपये की योजना तैयार कर समिति ने मंजूरी प्रदान की है।

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