चेन्नई , अप्रैल 30 -- तमिलनाडु स्थित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की तीसरी इकाई (यूनिट-3) को चालू करने की दिशा में एक बड़ी सफलता मिली है। 1000 मेगावाट क्षमता वाली इस इकाई में 'स्पिलेज टू ओपन रिएक्टर' की प्रक्रिया सफलतापूर्वक शुरू कर दी गई है, जो इस संयंत्र के मुख्य उपकरणों के परीक्षण और इसे चालू करने की दिशा में एक बहुत ही महत्वपूर्ण कदम है।।
न्यूक्लियर पावर कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (एनपीसीआईएल) ने जानकारी दी है कि तीसरी इकाई में कमीशनिंग की प्रक्रिया 25 अप्रैल, 2026 को हासिल की गयी। इसकी पहली दो इकाइयां पहले ही बिजली उत्पादन कर रही हैं। छह इकाइयों वाली इस परियोजना का निर्माण तमिलनाडु के तटीय जिले तिरुनेलवेली में रूस के तकनीकी सहयोग से किया जा रहा है। यह भारत और रूस के बीच हुए अंतर-सरकारी समझौते के तहत बनाई जा रही है।
एनपीसीआईएल के अनुसार, 'स्पिलेज टू ओपन रिएक्टर' परमाणु ऊर्जा संयंत्र को शुरू करने का एक बहुत ही जरूरी हिस्सा है। इसमें सुरक्षा प्रणालियों और मुख्य पाइपलाइनों (मेन कूलेंट पाइपलाइन्स) को लाइट वाटर से साफ (फ्लशिंग) किया जाता है। इसका मकसद यह सुनिश्चित करना होता है कि पूरी प्रणाली एकदम साफ रहे ताकि आगे के काम सुरक्षित ढंग से हो सकें। सफाई का यह काम मुख्य नियंत्रण कक्ष (मेन कंट्रोल रूम) से सुरक्षा पंपों को एक-एक करके चलाकर बहुत ही व्यवस्थित तरीके से पूरा किया गया।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि प्राथमिक प्रणाली के उपकरणों और पाइपों का अलग-अलग परीक्षण अब शुरू हो गया है। एनपीसीआईएल के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक बी. सी. पाठक ने रूस की कंपनी एटमस्ट्रोयएक्सपोर्ट (एएसई) के निदेशक एन. नोविकोव और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में इस प्रक्रिया का उद्घाटन किया।
वर्तमान में, कुडनकुलम की पहली और दूसरी इकाइयां काम कर रही हैं और उन्होंने अब तक लगभग 121 अरब यूनिट स्वच्छ बिजली बनाई है। इससे पर्यावरण को भी काफी फायदा हुआ है क्योंकि इसके कारण लगभग 10.4 करोड़ टन कार्बन डाइऑक्साइड जैसी गैसों को हवा में मिलने से रोका जा सका है। पहली इकाई ने 2014 में और दूसरी ने 2017 में अपना व्यावसायिक काम शुरू किया था।
तीसरी और चौथी इकाइयों के निर्माण की नींव 2016 में रखी गई थी और जून 2017 में कंक्रीट डालने का काम शुरू हुआ था। वहीं, पांचवीं और छठी इकाइयों का निर्माण जून 2021 में शुरू हुआ। तीसरी इकाई में अब तक गुंबद (डोम) बनाने और मुख्य पाइपलाइनों की वेल्डिंग जैसे कई बड़े काम पूरे हो चुके हैं। दिसंबर 2025 में ही रूस ने इस इकाई के लिए परमाणु ईंधन की पहली खेप पहुँचा दी थी, जिसे अब रिएक्टर के मुख्य हिस्से में डाला जाना है।
चौथी इकाई का निर्माण कार्य भी अब अंतिम चरण में है और उसके मुख्य हिस्सों का ढांचा तैयार हो चुका है। साथ ही, पांचवीं और छठी इकाइयों का निर्माण भी अलग-अलग स्तरों पर तेजी से चल रहा है। योजना के अनुसार, इन्हें धीरे-धीरे चालू किया जाएगा।
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