पटना , फरवरी 16 -- बिहार के स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने सोमवार को बिहार विधानसभा में कहा कि विभिन्न स्वास्थ्य मानकों पर बिहार के प्रदर्शन में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार आया है और कुछ मानकों पर तो प्रदेश की रैंकिंग देश में प्रथम स्थान पर पहुँच गई है।

मंत्री श्री पाण्डेय ने वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अपने विभाग की बजटीय मांगों पर चर्चा का जवाब देते हुए कहा कि राज्य ने स्वास्थ्य क्षेत्र में लगातार प्रगति की है। कुछ मानकों में बिहार की रैंकिंग देश में नंबर एक है। उन्होंने कहा कि डीवीडीएमएस सेंट्रल डैशबोर्ड पर राज्य के सरकारी अस्पताल दवाओं की आपूर्ति और वितरण के मामले में पिछले 17 महीनों से देश में प्रथम स्थान पर बने हुए हैं।

मंत्री ने बताया कि शिशु मृत्यु दर (आईएम्आर) वर्तमान में घटकर 23 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत 25 से बेहतर है। नवजात मृत्यु दर (एनएम्आर ) घटकर 18 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत 19 से कम है। इसी प्रकार, पाँच वर्ष से कम आयु के बच्चों की मृत्यु दर 27 हो गई है, जो राष्ट्रीय औसत 29 से बेहतर है।

श्री पांडेय ने कहा कि वर्ष 2005 में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (राजग) सरकार के सत्ता में आने से पहले बिहार में केवल छह सरकारी मेडिकल कॉलेज थे। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की दृष्टि के अनुरूप सरकार के सतत प्रयासों से राज्य में मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों की संख्या बढ़कर 12 हो गई। उन्होंने कहा कि वर्ष 2005 से पहले प्रदेश में तीन निजी मेडिकल कॉलेज राज्य में संचालित थे, जबकि पिछले 20 वर्षों में कुल मेडिकल कॉलेजों की संख्या बढ़कर 27 हो गई है। उन्होंने कहा कि यह बिहार की जनता को गुणवत्तापूर्ण उपचार सुविधा उपलब्ध कराने के लिए सरकार के निरंतर प्रयासों का परिणाम है।" उन्होंने यह भी बताया कि राज्य में मेडिकल कॉलेजों के संचालन में सुधार के लिए स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय की स्थापना की गई है और प्रदेश में अगले तीन वर्षों में मेडिकल कॉलेजों की संख्या 46 तक बढ़ाने का लक्ष्य है।

मंत्री ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग में विभिन्न रिक्त पदों पर शीघ्र ही बड़ी संख्या में नियुक्तियाँ की जाएँगी और इसकी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। कुल 36,934 डॉक्टरों, नर्सों, लैब तकनीशियनों और अन्य पैरामेडिकल कर्मियों की नियुक्ति की जाएगी।

मंत्री के जवाब से असंतुष्ट विपक्षी सदस्यों ने सदन से वॉकआउट किया। बाद में वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए स्वास्थ्य विभाग की 21,270.41 करोड़ रुपये की बजटीय मांगें सदन ने ध्वनिमत से पारित दिया।

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