दरभंगा , जुलाई 05 -- विश्व-प्रसिद्ध केंद्रीय विश्वविद्यालय जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के यूरोपियन स्टडीज के प्रोफेसर सत्यनारायण प्रसाद ने कहा कि किसी भी राष्ट्र की महानता उसके नागरिकों की महान सोच से निर्धारित होती है। ललित नारायण मिथिला विश्वविद्यालय, दरभंगा के राजनीति विज्ञान विभाग द्वारा विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी की अध्यक्षता में "भारत की विदेश नीति और समकालीन परिदृश्य" विषय पर आयोजित विशेष व्याख्यान को संबोधित करते हुए प्रोफेसर प्रसाद ने भारत की विदेश नीति के विकास ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और वर्तमान वैश्विक चुनौतियों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्ष 1947 में स्वतंत्रता प्राप्ति के समय भारत के समक्ष अनेक आंतरिक एवं बाह्य चुनौतियाँ थीं, जिनके समाधान के लिए स्वतंत्र विदेश नीति का स्वरूप विकसित हुआ।उन्होंने कहा कि उस समय विश्व दो प्रमुख गुटों पश्चिमी और साम्यवादी में विभाजित था तथा भारत पर किसी एक गुट में शामिल होने का दबाव था। इसके बावजूद भारतीय नेतृत्व ने रणनीतिक स्वायत्तता और स्वतंत्र विदेश नीति को अपनाते हुए गुटनिरपेक्ष दृष्टिकोण का समर्थन किया। यह विचार आगे चलकर तीसरी दुनिया के देशों की सशक्त आवाज बना तथा सहयोग, शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व और वैश्विक न्याय की अवधारणा को नई दिशा मिली जिससे विकासशील देशों के सशक्त आवाज को वैश्विक मंच मिला।
प्रो. प्रसाद ने कहा कि राष्ट्र निर्माण में समाज की भूमिका, व्यक्ति निर्माण तथा भारतीय आध्यात्मिक परंपरा का महत्वपूर्ण योगदान रहा है। उन्होंने वर्तमान बदलते वैश्विक परिदृश्य में उभरती चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि इनका प्रभावी समाधान दूरदर्शी कूटनीति, मजबूत रणनीति तथा दीर्घकालिक राष्ट्रीय योजनाओं के माध्यम से ही संभव है।
अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में विभागाध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार चौधरी ने कहा कि भारत की विदेश नीति शांति, सामरिक स्वायत्तता, बहुपक्षवाद, पड़ोसी देशों के साथ सहयोग तथा राष्ट्रीय हितों की सुरक्षा के सिद्धांतों पर आधारित है। वर्तमान समकालीन वैश्विक परिदृश्य में भारत 'वसुधैव कुटुम्बकम्' की भावना के साथ वैश्विक शांति, सतत विकास, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक साझेदारी को सुदृढ़ करते हुए एक जिम्मेदार वैश्विक शक्ति के रूप में अपनी भूमिका का निरंतर विस्तार कर रहा है।
पूर्व विभागाध्यक्ष प्रो मुनेश्वर यादव, सहायक प्रोफेसर सह उप परीक्षा नियंत्रक डॉ मनोज कुमार, सहायक प्रोफेसर डॉ उमाकांत पासवान, सहायक प्रोफेसर रघुवीर कुमार रंजन और सहायक प्राध्यापिका डॉ नीतू कुमारी के साथ वरीय शोधार्थी डॉ राम कृपाल अमर, सिद्धार्थ राज, सागर सिंह, रोहन कुमार, अमिनेश कुमार, रिकी गणेश कुमार, शालिनी व प्रभु शोधार्थी के साथ दर्जनों छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।
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