सहारनपुर , सितंबर 4 -- उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों से पहले भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सहयोगी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) की गुरुवार को रामपुर मनिहारान में हुई जबरदस्त रैली की सफलता से इंडिया गठबंधन चौकन्ना हो गया है।

रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी से एक दिन पहले ही सपा प्रमुख अखिलेश यादव सहारनपुर का राजनीतिक जायजा लेने आए थे। किन्हीं कारणवश उनकी छह सितंबर की रैली रद्द हो गई थी। उससे रालोद की स्वाभिमान रैली को नई संजीवनी मिली। पश्चिमी उत्तर प्रदेश में रालोद का मुख्य आधार जाट और मुस्लिम समीकरण रहा है लेकिन भाजपा के साथ गठबंधन में जाने से मुस्लिम रालोद से छिटक गया है। उसकी पूर्ति के लिए पश्चिमी उत्तर प्रदेश की प्रमुख गुर्जर किसान बिरादरी का साथ जयंत चौधरी को मिलने से रालोद फिर से एक नई ताकत के रूप में उभरता दिख रहा है।

सहारनपुर के प्रगतिशील किसान पद्मश्री चौधरी सेठपाल सिंह गुर्जर ने आज बताया कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में गुर्जर नेता के रूप में जो स्थिति पूर्व केंद्रीय मंत्री राजेश पायलट की हुआ करती थी उस स्थिति में आज सांसद चंदन चौहान राष्ट्रीय महासचिव की है। उन्होंने बताया कि किसानों और ग्रामीणों की विशाल सभा में 80 फीसद हिस्सेदारी सहारनपुर मंडल और आसपास की गुर्जर बिरादरी की थी। इसका पूरा श्रेय चंदन चौहान को जाता है जिन्होंने एक पखवाड़े के दौरान सुदूर गांवों में भी दिन-रात रैली की सफलता को पंचायतें कीं।

चौधरी सेठपाल का कहना था कि सांसद चंदन चौहान सहज, सरल और मिलनसार युवा नेता हैं। उनके पिता संजय चौहान और बाबा चौधरी नारायण सिंह पूर्व उपमुख्यमंत्री का पश्चिम के गुर्जरों में बहुत ही सम्मानित स्थान रहा है। उसी परंपरा को लेकर आज चंदन चौहान किसानों के बीच खड़े हैं। उनके आह्वान पर भारी संख्या में गुर्जरों एवं जाट बिरादरी ने स्वाभिमान रैली में शिरकत की।

उन्होंने कहा कि भाजपा और रालोद का गठबंधन होने से गुर्जर और जाट बिरादरी का बड़ा हिस्सा उन्हीं को जाएगा। इससे सपा-कांग्रेस गठबंधन को निश्चय ही घाटा उठाना पड़ सकता है। प्रमुख राजनीतिक विश्लेषक महाराज सिंह पोस्ट ग्रेज्युट कालेज के पूर्व प्राचार्य प्रोफेसर डा. योगेश कुमार गुप्ता ने कहा कि सपा से अलग होने के बाद रालोद के जनाधार में जो रिक्तता आई थी गुर्जरों की इस रैली से जयंत चौधरी के हाथ निश्चित ही मजबूत होंगे।

एक अन्य राजनीतिक समीक्षक चौधरी प्रीतम सिंह ने कहा कि अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी को लेकर अठन्नी-चवन्नी वाला बयान दिया था उससे पश्चिम का किसान बुरी तरह से आहत हुआ था। वह गुस्सा भी जयंत चौधरी की स्वाभिमान सभा को सफल बनाने में कारगर रहा।

उन्होंने कहा कि विधानसभा चुनावों में पश्चिम में अब इंडिया और एनडीए गठबंधन के बीच कांटे का और रोचक मुकाबला देखने को मिलेगा। लड़ाई एकतरफा नहीं रहने वाली है। पूर्व कुलपति और वरिष्ठ सेवानिवृत्त आईपीएस डा. अशोक कुमार राघव कहते हैं कि दस साल पूरे करने जा रहे योगी आदित्यनाथ का अपना पुख्ता जनाधार है और उन्होंने किसान/गन्ना उत्पादक किसानों के हितों का ध्यान रखा है। उनके दस साल के शासनकाल में पश्चिम में उग्र आंदोलनों के लिए पहचान रखने वाली भारतीय किसान यूनियन और उसके नेताओं चौधरी राकेश टिकैत को काफी हद तक शांत रखा है। पूरे उत्तर प्रदेश की राजपूत बिरादरी योगी आदित्यनाथ के साथ खड़ी है।

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