भुवनेश्वर , अक्टूबर 22 -- 'नवनिर्माण कृषक संगठन' ने केन्द्र सरकार पर लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने और आम लोगों की कीमत पर कॉरपोरेट हितों को बढ़ावा देने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री के 25 अक्टूबर के ओडिशा दौरे के दौरान विरोध-प्रदर्शन करने की घोषणा की है।

संगठन के संस्थापक अक्षय कुमार ने भुवनेश्वर में गुरुवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान विरोध-प्रदर्शन की योजना की घोषणा करते हुए आरोप लगाया कि केंद्र और ओडिशा सरकार असहमति की आवाज़ को दबा रही हैं, जबकि कॉरपोरेट घरानों को राज्य के प्राकृतिक संसाधनों का दोहन करने में मदद कर रही हैं।

रायगडा जिले में 'सिजीमाली खनन विवाद' का हवाला देते हुए श्री कुमार ने आरोप लगाया कि जो किसान और आदिवासी समुदाय अपनी जमीन, जंगल, पानी और खनिज संसाधनों को कॉरपोरेट हाथों में सौंपने का विरोध कर रहे हैं, उन्हें झूठे मामलों में फंसाकर, लंबे समय तक जेल में रखकर और पुलिस कार्रवाई के जरिए परेशान किया जा रहा है। उन्होंने इन घटनाओं को "विकास के नाम पर विनाश" करार दिया।

श्री कुमार ने केंद्र सरकार पर यह भी आरोप लगाया कि 2020-21 में दिल्ली में हुए लंबे किसान आंदोलन के बावजूद, सरकार 23 फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) की किसानों की मांग को पूरा करने में विफल रही। उन्होंने दावा किया कि उस आंदोलन के दौरान 750 से अधिक किसानों की मौत हो गई थी। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार की नीतियों ने कृषि संकट को और गहरा कर दिया है, जिसके कारण किसान आत्महत्या करने को मजबूर हुए हैं।

ओडिशा सरकार की स्कूली शिक्षा व्यवस्था पर निशाना साधते हुए श्री कुमार ने कहा कि सरकार ने कक्षा एक से आठ तक की पाठ्यपुस्तकों में 1,678 गलतियां होने की बात स्वीकार की थी। लेकिन बार-बार विरोध-प्रदर्शन के बावजूद, सुधारी गई किताबें अभी तक छात्रों तक नहीं पहुंची हैं। उन्होंने स्कूल और जन शिक्षा मंत्री नित्यानंद गोंड द्वारा नैतिक जिम्मेदारी न लेने और इस्तीफा न देने पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस देरी से लगभग एक करोड़ छात्रों का शैक्षणिक भविष्य खतरे में पड़ गया है।

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