जयपुर , अप्रैल 30 -- किसान महापंचायत के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामपाल जाट ने दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता मिशन के तहत राजस्थान में चने के दाने दाने की खरीद करने की केन्द्र सरकार से मांग की है।
श्री जाट ने केन्द्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान को पत्र लिखकर यह मांग की। उन्होंने पत्र में किसानों को चने के दाने-दाने की न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद की सुनिश्चितता के लिए राज्य सरकार को निर्देशित करने की मांग की।
उन्होंने कहा कि चने का एक क्विंटल का घोषित 'न्यूनतम समर्थन मूल्य' 5875 रुपए है तथा बाजार भाव पांच हजार से 5200 रुपए प्रति क्विंटल है। किसानों से 40 क्विंटल की सीमा तक ही चना खरीदा जाएगा तो उसे शेष उत्पादित चना 775 रुपए प्रति क्विंटल का घाटा उठाकर बेचना पड़ेगा। जनकल्याणकारी सरकारों द्वारा संदर्भित मानक संचालन प्रक्रिया के अनुसार दाने-दाने की ख़रीद अपरिहार्य है।
उन्होंने पत्र में बताया कि राजस्थान में खरीद के लिए पांच हजार से अधिक किसानों के पंजीयन हो चुके हैं। इसके तहत राजस्थान में खरीद अभी तक अजमेर जिले के किशनगढ़ में ही आरंभ हुई है और वहां भी जिन किसानों ने राजफैड में पंजीयन कराया एवं जिनकी 40 क्विंटल की सीमा तक खरीद हो चुकी है, उनको इस योजना से वंचित किया जा रहा है जबकि राजफैड ने भी मूल संस्था नेफैड के आधार पर उसके अभिकर्ता के रूप में पंजीयन किए थे, जिसका दायित्व भी मूल संस्था का ही होता है। इसलिए राजफैड द्वारा किए गए पंजीयन के आधार पर भी नेफैड को सीधी खरीद किया जाना चाहिए।
उन्होंने केन्द्र सरकार द्वारा आरंभ की गई दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता मिशन जैसी कल्याणकारी नीति के क्रियान्वयन का राज्यों का कर्तव्य बताते हुए कहा कि राजस्थान जैसे दलहन उत्पादक राज्यों द्वारा नीति को निष्प्रभावी बनाना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है। राजस्थान एवं अन्य चना उत्पादक राज्यों में नेफैड द्वारा इस नीति के अनुसार प्रत्येक 'ग्राम सेवा सहकारी समिति' पर खरीद केंद्र संचालित किये जाना जनहित में आवश्यक है। श्री जाट ने पत्र में कहा कि जिन किसानों को सरकारी खरीद प्रबंधन के अभाव में अपना चना कृषि उपज मंडियों में एमएसपी से कम दामों में बेचना पड़ा, उनको 'मूल्य घाटा भुगतान योजना' (पीडीपीएस) के तहत घाटे की पूर्ति के लिए उनके बैंक खातों में राशि अंतरण किया जाना चाहिए।
श्री जाट ने मांग की कि किसानों के चने की दाने-दाने खरीद की सुनिश्चितता की जाये।
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