चंडीगढ़ , सितंबर 23 -- हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि किसान की लागत घटे, मेहनत कम हो और फसल का लाभ बढ़े, वही तकनीक उसके लिए वास्तविक नवाचार है। किसी भी तकनीक की सफलता किसान के हिसाब-किताब में दिखाई देनी चाहिए। किसान के लिए वही तकनीक उपयोगी है, जो उसकी पहुंच में हो, आसानी से इस्तेमाल हो सके और जिसकी मरम्मत गांव के आसपास उपलब्ध हो।

मुख्यमंत्री ने बुधवार को कुरुक्षेत्र के लाडवा में सीआईआई के पांचवें 'इनोवेटिव फार्मर्स मीट' के समापन अवसर पर यह बात कही। उन्होंने कृषि यंत्रों की प्रदर्शनी का उद्घाटन एवं अवलोकन किया और प्रगतिशील किसानों से बातचीत की। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम की विशेषता यह है कि चर्चा बड़े शहरों या सभागारों तक सीमित न रहकर सीधे किसानों के बीच पहुंच रही है।

श्री सैनी ने कहा कि मौसम की अनिश्चितता, पानी की कमी और मिट्टी की बिगड़ती सेहत खेती के सामने बड़ी चुनौतियां हैं। ऐसी खेती की जरूरत है, जो बदलती परिस्थितियों का सामना करने के साथ किसान की आय भी बढ़ाए। उन्होंने धान की सीधी बिजाई, सूक्ष्म सिंचाई और खेतों को समतल करने जैसे उपाय अपनाने की सलाह दी। किसानों से भूमि की जांच करवाकर जरूरत के अनुसार खाद का इस्तेमाल करने तथा फसल चक्र और जैविक पदार्थों के माध्यम से मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने का आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि छोटा किसान हर महंगी मशीन अकेले नहीं खरीद सकता। इसलिए किसान समूहों, सहकारी समितियों और किराये पर मशीन उपलब्ध कराने वाले केंद्रों की भूमिका महत्वपूर्ण है। गांव के युवाओं को मशीन संचालन, मरम्मत और कृषि सेवाओं का प्रशिक्षण दिया जाए, ताकि किसानों का खर्च घटने के साथ ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर भी बढ़ें।

उन्होंने फसल विविधीकरण पर जोर देते हुए कहा कि परिस्थितियों के अनुसार दलहन, तिलहन, सब्जियों, फलों और अन्य फसलों की संभावनाएं तलाशनी चाहिए। उद्योगों से किसानों को गुणवत्ता और खाद्य सुरक्षा मानकों का प्रशिक्षण देने तथा बेहतर बाजार से जोड़ने में सहयोग करने का भी आह्वान किया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार किसानों की आय बढ़ाने, सिंचाई सुविधाओं का विस्तार करने, प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण और कृषि को तकनीक से जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि प्राकृतिक खेती के लिए शुरू पोर्टल पर करीब दो लाख किसानों ने तीन लाख एकड़ क्षेत्र का पंजीकरण कराया है। इनमें से 44 हजार एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती के लिए 23,930 किसानों का सत्यापन किया जा चुका है। वर्ष 2025-26 में प्रदेश में 20,727 एकड़ क्षेत्र में प्राकृतिक खेती की गई।

उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री कुसुम योजना के तहत सोलर पंप लगाने के लिए किसानों को 75 प्रतिशत अनुदान दिया जा रहा है। अब तक एक लाख 95 हजार सोलर पंप स्थापित किए जा चुके हैं। पराली प्रबंधन और गांठ बनाने के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ प्रोत्साहन राशि का प्रावधान है और अब तक 10 लाख किसानों को 907 करोड़ रुपये की सब्सिडी दी जा चुकी है।

कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्याम सिंह राणा ने कहा कि किसानों को धान की सीधी बिजाई अपनानी चाहिए। इससे करीब 15 हजार रुपये प्रति एकड़ तक का लाभ हो सकता है। इसमें लगभग 10 हजार रुपये प्रति एकड़ लागत की बचत और सरकार की ओर से चार से पांच हजार रुपये प्रति एकड़ की सहायता शामिल है। उन्होंने कहा कि सीधी बिजाई से पानी की भी बचत होती है।

श्री राणा ने कहा कि वर्तमान में पानी, मिट्टी और हवा का संतुलन प्रभावित हो रहा है और जमीन की सेहत भी खराब हो रही है। इसलिए प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के लिए गंभीरता से काम करने की आवश्यकता है। कार्यक्रम में पूर्व राज्य मंत्री सुभाष सुधा, सीआईआई हरियाणा के अध्यक्ष साकेत भाटिया, अन्य पदाधिकारी और बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।

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