लखनऊ , जुलाई 10 -- उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ना किसानों के हितों की सुरक्षा और खेती की गुणवत्ता बढ़ाने के उद्देश्य से बड़ा फैसला लिया है। अब प्रदेश की सभी चीनी मिलें किसानों को केवल प्रमाणित और गुणवत्ता परीक्षण से गुजरे उर्वरक, जैव उर्वरक, सूक्ष्म पोषक तत्व तथा कीटनाशक ही उपलब्ध करा सकेंगी। इस संबंध में गन्ना आयुक्त मिनिस्ती एस ने प्रदेश की सभी चीनी मिलों के लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं।
नई व्यवस्था के तहत प्रत्येक बैच के कृषि निवेश की गुणवत्ता जांच राष्ट्रीय परीक्षण एवं अंशांकन प्रयोगशाला प्रत्यायन बोर्ड (एनएबीएल) से मान्यता प्राप्त प्रयोगशालाओं में कराना अनिवार्य होगा। केवल वही उत्पाद किसानों को उपलब्ध कराए जाएंगे, जो उर्वरक (नियंत्रण) आदेश-1985, कीटनाशक अधिनियम-1968 और अन्य निर्धारित मानकों पर खरे उतरेंगे। इससे किसानों को नकली और घटिया कृषि उत्पादों से राहत मिलने की उम्मीद है।
जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि भारत सरकार द्वारा प्रतिबंधित कीटनाशकों का वितरण किसी भी परिस्थिति में नहीं किया जाएगा। साथ ही भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर), उत्तर प्रदेश गन्ना शोध परिषद तथा कृषि विश्वविद्यालयों के वैज्ञानिकों द्वारा अनुशंसित कृषि निवेशों और फसल सुरक्षा उत्पादों को प्राथमिकता दी जाएगी।
सरकार ने किसानों के अधिकारों को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए निर्देश दिया है कि किसी भी किसान को उसकी मांग और स्पष्ट सहमति के बिना कोई कृषि निवेश उपलब्ध नहीं कराया जाएगा। व्यावसायिक लाभ के लिए लक्ष्य निर्धारित कर अनावश्यक कृषि निवेश का वितरण पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। कृषि सामग्री केवल किसान की वास्तविक आवश्यकता और गन्ना क्षेत्रफल के अनुरूप ही उपलब्ध कराई जाएगी।
सरकार ने कृषि निवेश की गुणवत्ता की पूरी जिम्मेदारी संबंधित चीनी मिलों पर तय की है। चाहे वितरण स्वयं चीनी मिल करे या किसी एजेंसी के माध्यम से, गुणवत्ता और वितरण से जुड़े सभी उत्तरदायित्व मिल प्रबंधन के ही होंगे। इसके अलावा जिला गन्ना अधिकारी और उप गन्ना आयुक्त नियमित निरीक्षण एवं निगरानी करेंगे।
निर्देशों के अनुसार यदि कोई चीनी मिल किसानों की सहमति के बिना अथवा घटिया कृषि निवेश वितरित करती पाई जाती है तो उसके विरुद्ध कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों में गन्ना मूल्य से कृषि निवेश की धनराशि की वसूली या समायोजन की व्यवस्था तत्काल समाप्त कर दी जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर संबंधित चीनी मिल की बैंक गारंटी भी जब्त की जा सकेगी।
सरकार ने बाजार और सोशल मीडिया पर भी निगरानी बढ़ाने का निर्णय लिया है। गन्ना एवं कृषि विभाग संयुक्त रूप से बाजार में उपलब्ध कीटनाशकों की नियमित सैंपलिंग और गुणवत्ता जांच करेंगे। साथ ही भ्रामक प्रचार करने वाले विक्रेताओं तथा सोशल मीडिया पर गलत जानकारी फैलाने वालों के विरुद्ध कीटनाशक अधिनियम-1968 एवं संबंधित नियमों के तहत कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
राज्य सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से गन्ना खेती अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और किसान-केंद्रित बनेगी। गुणवत्ता युक्त कृषि निवेश उचित मूल्य पर उपलब्ध होने से खेती की लागत नियंत्रित होगी, मृदा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा तथा गन्ने की उत्पादकता और किसानों की आय में वृद्धि होगी। इसके साथ ही प्रदेश के गन्ना एवं चीनी उद्योग को भी नई मजबूती मिलेगी।
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