मुंबई , जून 22 -- विपक्षी गठबंधन महा विकास अघाड़ी (एमवीए) के पारंपरिक चाय पार्टी का बहिष्कार करने और किसानों के मुद्दों को लेकर विधान भवन की सीढ़ियों पर विरोध प्रदर्शन करने के साथ ही सोमवार को महाराष्ट्र विधानमंडल का मानसून सत्र हंगामेदार अंदाज में शुरू हुआ।

सदन की कार्यवाही शुरू होने से पहले मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और उप मुख्यमंत्री सुनेत्रा पवार ने विधान भवन परिसर में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की।

सदन के बाहर का राजनीतिक माहौल काफी गर्म रहा। विपक्षी नेताओं ने किसानों की पूर्ण और तत्काल कर्जमाफी की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। किसानों को कर्जमुक्त होना ही चाहिए, जैसे नारे लगाते हुए प्रदर्शनकारियों ने कृषि संकट के मुद्दे पर महायुति सरकार को घेरने की कोशिश की।

श्री फडणवीस ने संवाददाता सम्मेलन में पारंपरिक चाय पार्टी का बहिष्कार करने के लिए विपक्ष पर तीखा पलटवार किया।

मुख्यमंत्री ने कहा, " हमने आम नागरिकों की समस्याओं का समाधान खोजने और सकारात्मक चर्चा करने के इरादे से पूरे तीन सप्ताह के सत्र की योजना बनायी थी। यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि विपक्ष ने चाय पार्टी का बहिष्कार करना चुना। "विपक्ष पर तंज कसते हुए श्री फडनवीस ने कहा, " चर्चा के लिए आने के बजाय उन्होंने हमें छह पृष्ठों का पत्र सौंप दिया। ऐसा लगता है कि यह पत्र कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की मदद से तैयार किया गया है। मानो विपक्ष के पास विचारों की कमी हो गयी है और खुद के दम पर मुद्दे उठाने की रचनात्मकता अब उनमें नहीं बची है। "उप मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने भी विपक्ष की आलोचना की और उनसे विधानसभा की सीढ़ियों पर 'स्टंटबाजी' करने से बचने का आग्रह किया। श्री शिंदे ने चुनौती देते हुए कहा, " विपक्ष को सीढ़ियों पर प्रदर्शन करने के बजाय सदन के भीतर आना चाहिए और रचनात्मक बहस में हिस्सा लेना चाहिए। "सरकार ने इस सत्र के लिए व्यस्त विधायी एजेंडा प्रस्तावित किया है। पेश किये जाने वाले प्रमुख विधेयकों में महाराष्ट्र राज्य अनुसूचित जाति आयोग (संशोधन) विधेयक, सरकारी कर्मचारी स्थानांतरण विधेयक, महाराष्ट्र निजी कौशल विश्वविद्यालय (स्थापना और विनियमन) (दूसरा संशोधन) विधेयक और महाराष्ट्र वस्तु एवं सेवा कर (संशोधन) विधेयक, 2026 (वित्त विभाग) शामिल हैं।

विपक्षी नेताओं ने 13 महत्वपूर्ण मुद्दों पर सरकार को घेरने के अपने इरादे की घोषणा की है। इससे आने वाले दिनों में सत्र के बेहद टकरावपूर्ण रहने के संकेत मिल रहे हैं।

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