गुरुग्राम , सितंबर 04 -- संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के प्रतिनिधिमंडल की केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर के साथ गुरुग्राम में गुरूवार को तीन घंटे तक बैठक हुई। यह बैठक चार सितंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन केंद्रीय मंत्री के आग्रह पर तीन सितंबर को ही आयोजित की गई।

बैठक में किसानों ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नाम 10 सूत्रीय मांग पत्र सौंपकर विभिन्न मांगों के समाधान की मांग की। मोर्चा की ओर से जगजीत सिंह डल्लेवाल (पंजाब), पी.आर. पांडियन (तमिलनाडु), महेश बेलगांवकर (कर्नाटक), गजेंद्र झाला (गुजरात), इंद्रजीत पन्नीवाला (राजस्थान), राजिंदर चहल और हर्षदीप सिंह (हरियाणा), लीलाधर राजपूत (मध्य प्रदेश), प्रह्लाद पुनिया व सोनवीर चौधरी (उत्तर प्रदेश), सतनाम सिंह बहेरू, सुखदेव सिंह भोजराज (पंजाब) और अभिमन्यु कोहाड़ (हरियाणा) और अन्य प्रतिनिधि मौजूद रहे।

बैठक में भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर किसानों और मजदूरों की चिंताएं केंद्रीय मंत्री के समक्ष रखी गईं। किसान नेताओं ने कृषि, डेयरी, पोल्ट्री और मछली पालन क्षेत्रों को प्रस्तावित समझौते से बाहर रखने की मांग की। मोर्चे के अनुसार, केंद्रीय मंत्री ने आश्वासन दिया कि इन क्षेत्रों के हितों को सुरक्षित रखा जाएगा और केंद्र सरकार जल्द ही इस विषय पर सार्वजनिक रूप से अपना रुख स्पष्ट करेगी।

हाईटेंशन बिजली लाइनों के मुआवजे के मुद्दे पर मंत्री ने मौजूदा नीति में कुछ कमियां स्वीकार करते हुए उन्हें दूर कर बेहतर नीति लाने की बात कही। जमीन की बाजार कीमत तय करने की प्रक्रिया में पारदर्शिता लाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली लाइनों के 'राइट ऑफ वे' के लिए बाजार मूल्य का 60 प्रतिशत मुआवजा देने के प्रस्ताव पर गंभीर विचार का आश्वासन दिया गया।

बिजली संशोधन विधेयक के संबंध में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार राज्य सरकारों के बिजली संबंधी निर्णयों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और खेती-किसानी से संबंधित कोई बदलाव करने का एजेंडा केंद्र के पास नहीं है। किसान नेताओं के अनुसार, 2020-21 और 2024-25 सहित विभिन्न किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज मामलों को वापस लेने की प्रक्रिया के लिए भी संबंधित अधिकारियों से बातचीत कर सकारात्मक कदम उठाने का आश्वासन दिया गया।

किसान मोर्चे ने सभी फसलों की एमएसपी पर खरीद सुनिश्चित करने के लिए एमएसपी गारंटी कानून बनाने, स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार सी2 लागत पर 50 प्रतिशत जोड़कर एमएसपी निर्धारित करने और किसानों की संपूर्ण कर्ज माफी की मांग की। इसके अलावा 2013 के भूमि अधिग्रहण कानून के प्रावधान दोबारा लागू करने की मांग भी रखी गई।

मांग पत्र में गन्ने का एफआरपी बढ़ाकर कम से कम 600 रुपये प्रति क्विंटल करने, किसानों को 14 दिनों के भीतर गन्ने का भुगतान सुनिश्चित करने, जलवायु परिवर्तन एवं प्राकृतिक आपदाओं से होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने तथा फसल बीमा योजना में किसान हितैषी बदलाव करने की मांग की गई है।

मोर्चे ने बीज विधेयक और बिजली संशोधन विधेयक में किसानों से संबंधित प्रावधान व्यापक किसान सहमति के बिना लागू न करने तथा किसान आंदोलनों के दौरान दर्ज सभी मुकदमे रद्द करने की मांग भी रखी।

यह बैठक 16 अगस्त को संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) की 51 किसानों की 'किसान बचाओ पदयात्रा' को रोके जाने के बाद किसानों और केंद्र के बीच बातचीत की कड़ी में हुई। मोर्चे ने कहा कि वह किसानों और कर्मचारियों के अधिकारों से जुड़े मुद्दों को लेकर अपना संघर्ष जारी रखेगा।

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