चंडीगढ़ , सितंबर 07 -- संयुक्त किसान मोर्चा (गैर-राजनीतिक) के आह्वान पर सोमवार को देशभर में किसानों से जुड़ी मांगों को लेकर जिला एवं उपजिला अधिकारियों के माध्यम से राष्ट्रपतिके नाम ज्ञापन सौंपे गये।

हरियाणा में संगठन ने राज्य से संबंधित मांगों को लेकर मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नाम भी अलग ज्ञापन दिया। राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन में पंजाब में भारतीय किसान यूनियन एकता सिद्धूपुर के नेतृत्व में चल रहे आंदोलन और किसानों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई का मुद्दा उठाया गया। संगठन ने दावा किया कि फरीदकोट सहित पंजाब के विभिन्न स्थानों पर 30 मार्च से पंजाब स्टेट कोऑपरेटिव एग्रीकल्चरल डेवलपमेंट बैंक के समक्ष किसानों का धरना जारी है।

ज्ञापन में 29 अगस्त को फरीदकोट धरने में शामिल होने जा रहे किसानों की कथित गिरफ्तारियों का उल्लेख करते हुए गिरफ्तार किसानों की रिहाई और उनके खिलाफ दर्ज मामलों को वापस लेने की मांग की गयी। संगठन ने पुलिस कार्रवाई और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों की स्वतंत्र जांच कराने की भी मांग की।

किसान संगठनों ने पंजाब में बैंक द्वारा किसानों से लिये गये खाली चेक वापस कराने, कृषि ऋण के लिए वन टाइम सेटलमेंट (ओटीएस) योजना लागू करने तथा शंभू और खनौरी किसान मोर्चों के दौरान किसानों की संपत्ति को हुए कथित नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की। उन्होंने पंजाब सरकार से किसानों के साथ तत्काल वार्ता कर लंबित मांगों का समयबद्ध समाधान करने का आग्रह किया।

हरियाणा के मुख्यमंत्री के नाम दिये ज्ञापन में धान की खरीद 15 सितंबर से सुचारू रूप से शुरू करने और नमी की स्वीकार्य सीमा 17 से बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने की मांग की गयी। संगठन ने गन्ने का भाव 600 रुपये प्रति क्विंटल करने तथा इकबालपुर चीनी मिल से किसानों के पिछले नौ वर्षों के बकाये का भुगतान कराने की मांग भी रखी।

ज्ञापन में किसान क्रेडिट कार्ड की सीमा तीन लाख से बढ़ाकर पांच लाख रुपये करने की घोषणा लागू करने, 'मेरी फसल, मेरा ब्यौरा' पोर्टल दोबारा खोलने तथा आगामी रबी सीजन में डीएपी और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की गयी।

किसान संगठनों ने हिसार, हांसी, जींद, फतेहाबाद, सिरसा और भिवानी समेत कई जिलों को सूखाग्रस्त घोषित कर किसानों को मुआवजा देने तथा हाईटेंशन बिजली लाइनों के लिए पारदर्शी तरीके से बाजार मूल्य के आधार पर उचित मुआवजा देने की मांग भी की। संगठन ने चेतावनी दी कि मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में किसानों को बड़े आंदोलन का रास्ता अपनाना पड़ सकता है।

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