हमीरपुर , मार्च 17 -- उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले में किसानों की जमीन की पैमाइश में होने वाली हेराफेरी को रोकने के लिये अब उपग्रह तकनीक का उपयोग किया जायेगा। शासन ने पहली बार प्रदेश में किसानों की जमीन की नापजोख उपग्रह के माध्यम से कराने का निर्णय लिया है। इसके लिये बांदा मंडल में राजस्व अधिकारियों का प्रशिक्षण शुरू कर दिया गया है।

उपजिलाधिकारी सदर डी. शर्मा ने मंगलवार को बताया कि अब तक कृषक और अकृषक भूमि की पैमाइश लेखपाल द्वारा जरीब से की जाती थी। इस प्रक्रिया में अक्सर किसानों द्वारा जमीन कम या ज्यादा नापे जाने के आरोप लगते थे, जिससे गांवों में विवाद और मारपीट की घटनाएं भी होती थीं। ऐसे मामलों में लोग उपजिलाधिकारी और तहसीलदार के यहां मुकदमे दर्ज कराते थे और फिर कानूनगो तथा नायब तहसीलदार की निगरानी में दोबारा पैमाइश करायी जाती थी, जिससे मामला लंबा खिंच जाता था।

उन्होंने बताया कि शासन ने रोवर योजना के तहत नई तकनीक लागू करते हुए जमीन की नापजोख उपग्रह से कराने का फैसला किया है। इस प्रणाली से जमीन की वास्तविक लंबाई और चौड़ाई सामने आ जायेगी और पैमाइश में किसी प्रकार की हेराफेरी की गुंजाइश नहीं रहेगी।

श्री शर्मा के अनुसार इसके लिये बांदा में चित्रकूट मंडल के अंतर्गत आने वाले जिलों हमीरपुर, महोबा, चित्रकूट और बांदा के राजस्व अधिकारियों को बुलाकर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। फिलहाल हमीरपुर से तहसीलदार और नायब तहसीलदारों को प्रशिक्षण दिया गया है, जबकि उपजिलाधिकारियों को भी प्रशिक्षण प्राप्त करना अनिवार्य होगा।

उन्होंने कहा कि नई तकनीक को समझने में समय लग सकता है, हालांकि शासन ने इसे पूरे प्रदेश में लागू कर दिया है और उम्मीद जतायी है कि इसके सकारात्मक परिणाम सामने आयेंगे। साथ ही लेखपालों को नापजोख के लिये कुछ नये उपकरण भी उपलब्ध कराये जाने की संभावना है।

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