पटना , अक्टूबर 14 -- बिहार के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल सैयद अता हसनैन (सेवानिवृत्त) ने किशोरों के मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशीलता और जागरूकता को जरूरी बताते हुए कहा कि अभिभावकों, शिक्षकों और शैक्षणिक संस्थानों को बच्चों की समस्याओं को समझना चाहिए तथा उन्हें अपनी परेशानियां बिना किसी डर के साझा करने के लिए अनुकूल माहौल उपलब्ध कराना चाहिए।

राज्यपाल ने मंगलवार को बिहार लोक भवन में महिला इमदाद कमिटी की ओर से 'मानसिक स्वास्थ्य का महत्व : किशोरों का संज्ञानात्मक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य' विषय पर आयोजित दो दिवसीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में कहा कि आज के किशोर पढ़ाई, परीक्षा, प्रतियोगिता, रोजगार की चिंता, बुलिंग और निजी संबंधों से जुड़े दबावों का सामना कर रहे हैं। इनका असर उनके मानसिक स्वास्थ्य पर पड़ सकता है। इसलिए बच्चों के व्यवहार और भावनाओं में होने वाले बदलावों को समय रहते समझना और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों की मदद लेना आवश्यक है।

श्री हसनैन ने कहा कि असफलता जीवन का अंत नहीं, बल्कि उससे सीखकर आगे बढ़ने का अवसर है। परीक्षा में कम अंक आना या किसी काम में असफल होना बच्चे के भविष्य का निर्धारण नहीं करता। अभिभावकों और शिक्षकों को बच्चों की बातें ध्यानपूर्वक सुननी चाहिए और उन्हें ऐसा वातावरण देना चाहिए, जिसमें वे बिना किसी डर के अपनी समस्याएं बता सकें।

राज्यपाल ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को छिपाना या नजरअंदाज करना उचित नहीं है। ऐसी समस्याओं से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग का भाव रखना चाहिए। उन्होंने उपचार के दौरान चिकित्सकों की सलाह का पालन करने और निर्धारित उपचार को बीच में नहीं छोड़ने की आवश्यकता पर भी जोर दिया।

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