नयी दिल्ली , जून 16 -- हिमाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के प्रयासों से लंबे समय से लंबित किशाऊ बांध परियोजना को लेकर बड़ा वित्तीय गतिरोध समाप्त हो गया है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में यहां आयोजित उच्च स्तरीय बैठक में परियोजना के वित्तीय ढांचे पर महत्वपूर्ण सहमति बनी, जिससे 15,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली 422 मेगावाट क्षमता की इस परियोजना के निर्माण का मार्ग प्रशस्त हो गया।

टौंस नदी पर हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड की सीमा पर प्रस्तावित इस परियोजना में विद्युत घटक से जुड़ी लगभग 2,000 करोड़ रुपये की लागत अब लाभान्वित राज्य दिल्ली, हरियाणा और राजस्थान वहन करेंगे। इससे हिमाचल प्रदेश पर पड़ने वाला वित्तीय बोझ काफी कम होगा।

श्री सुक्खू ने कहा कि पूर्व सरकार राज्य के हिस्से के रूप में 800 करोड़ रुपये देने पर सहमत हो गई थी, लेकिन वर्तमान सरकार ने प्रदेश हितों को प्राथमिकता देते हुए इसे स्वीकार नहीं किया। उन्होंने कहा कि परियोजना के कारण सर्वाधिक विस्थापन हिमाचल प्रदेश में होगा, इसलिए राज्य पर अतिरिक्त आर्थिक भार डालना उचित नहीं था। उन्होंने बताया कि परियोजना पूरी होने के बाद हिमाचल प्रदेश को प्रतिवर्ष 100 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी, जिसकी अनुमानित कीमत करीब 600 करोड़ रुपये होगी। इससे राज्य की आय और ऊर्जा संसाधनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होगी।

मुख्यमंत्री ने इसे प्रदेश के अधिकारों और हितों की बड़ी जीत बताया।

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